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नगरपालिका पर हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप

7 वर्ष पहले
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वििदशा| नगरपालिकाने अब तक नियम विरुद्ध संचालित शादी गृहों तथा गार्डनों की तो सूची तैयार की है और ही न्यायालय के आदेश को गंभीरता पूर्वक लेेने की कोशिश की है। उक्ताशय का आरोप आरटीआई कार्यकर्ता विनोद के शाह ने लगाया है।

श्री शाह का कहना है कि मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ द्वारा वर्ष 2013 में न्यायाधीशद्वय एसके गंगले एवं एमके मुद्गल द्वारा एक जनहित याचिका का निराकरण करते हुए जिले के मैरिज गार्डनों, होटलों एवं धर्मशालाओं में पार्किंग के लिए कुल निर्माण का 35 फीसदी हिस्सा खुला छोडऩे के लिए जिला प्रशासन तथा नगरीय निकायों को आदेशित किया था।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि नियमों का पालन करने वाले परिसरों की अनुमतियों को तब तक स्थगित रखा जाए जब तक कि वह अपनी व्यवस्थाओं में आदेशानुरूप सुधार कर ले। आदेश का पालन किस तरह किया गया यह जानने के लिए एक साल बाद आरटीआई कार्यकर्ता विनोद शाह ने नगरपालिका से जानकारी मांगी तो कलई खुल कर सामने गई। नपा ने जानकारी दी कि न्यायालय के आदेश के पालन में नवंबर 2013 में शहर के 27 मैरिज गार्डन संचालकों एवं 20 धर्मशालाओं को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति वितरित कराकर आदेश से अवगत करा दिया था। लेकिन आदेश मानने वाले किसी भी परिसर की तो सूची बनाई गई है और ही कोई कार्रवाई की गई है। इस तरह उच्च न्यायालय के आदेश को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया गया है।