कुटीर निर्माण में 3 करोड़ की गड़बड़ी
जिलाकेंद्रीय सहकारी बैंक की उदयपुर शाखा में मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 3 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद शाखा के तत्कालीन प्रबंधक राकेश राय का स्थानांतरण विदिशा की ठर्र ब्रांच में कर दिया गया है तथा सुपरवाइजर सुरेंद्र खेमरिया को विदिशा भेज दिया गया है। मामले की जांच तीन सदस्यीय समिति से कराई गई है। समिति की जांच रिपोर्ट बैंक के एमडी विनयसिंह को सौंप दी गई है।
समिति ने जांच में शिकायत को सही पाया है, लेकिन जांच रिपोर्ट को उजागर नहीं किया जा रहा है। पूरे मामले को दबाने की तैयारी चल रही है। बैंक की इसी शाखा में दो साल पहले बाबली सहकारी समिति में किसानों को 21 लाख रुपए का चूना लगाने का मामला उजागर हुआ था। समिति के सचिव की छुट्टी कर पूरा मामला दबा दिया गया था। आवास कुटीर राशि आवंटन में गड़बड़ी की जांच यदि जिला प्रशासन या शासन किसी बाहरी और निष्पक्ष एजेंसी से कराए तो बड़ी गड़बड़ी उजागर हो सकती है।
यहथी शासन की योजना: मुख्यमंत्रीआवास योजना के तहत दो हेक्टेयर से कम कृषि भूमि या दो लाख रुपए से कम वार्षिक आय होने पर पात्र व्यक्ति को आवास निर्माण के लिए पूर्व में 60 हजार रुपए का ऋण देने का प्रावधान था। बाद में सरकार ने ऋण राशि बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दी थी। इसमेें पात्र व्यक्ति का अंशदान 10 हजार रुपए था। राशि बढऩे पर अंशदान 20 हजार रुपए कर दिया गया। ऋण का आधा हिस्सा सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दिया जाता है।
प्रबंधक सुपरवाइजर को हटाया
जनपदपंचायत से चयनित पात्र लोगों की सूची भेजी जाती है बैंक में सुपरवाइजर जांच कर प्रकरण प्रस्तुत करता है, जिस के आधार पर बैंक प्रबंधक ऋण स्वीकृत करता है। जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि सारे नियम और निर्देशों को ताक में रखकर मिली भगत से योजना के ऋण वितरित किए गए हैं। तत्कालीन बैंक मैनेजर और सुपरवाइजर का स्थानांतरण कर दिया गया है। जांच दल ने बैंक के एमडी को रिपोर्ट दे दी है। अब मामला रफा दफा करने की तैयारी है। यही कारण है कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नही किया जा रहा है।
पूर्वमें भी हो चुकी है गड़बड़ी
दोसाल पहले इसी बैंक शाखा के अंतर्गत बावली सहकारी समिति में किसानों के नाम पर २१ लाख रुपए के खाद- बीज ऋण निकालने का मामला उजागर हुआ था। खातेदारों की शिकायत के बाद समिति सचिव मोहन शर्मा की सेवाएं समाप्त