पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अधूरी मार्किंग, खतरे में सफर

अधूरी मार्किंग, खतरे में सफर

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
(विदिशा। कई जगह से गायब हो चुकी मार्किंग।)
विदिशा। विदिशा शहर में पिछले कुछ माह पहले बना हाईवे सुविधा कम और मुसीबत का सबब अधिक साबित हो रहा है। हाईवे पर लोगों के सुरक्षित सफर के लिहाज से जरूरी मार्किंग को लापरवाही के अंदाज में अंजाम दिया जा रहा है। खास बात यह है कि सिविल लाइंस क्षेत्र में वीआईपी बंगलों के क्षेत्र को छोड़कर पूरे हाईवे पर मार्किंग की महज खाना पूर्ति की गई है। इससे लोगों को रात में हाईवे पर वाहन चलाने में जोखिम उठाना पड़ रहा है।

ईदगाह से पीतलमिल तक नवनिर्मित सीसी हाईवे का कार्य पूर्ण होने के चार महीने बाद जाकर मार्किंग की गई है। महज रस्म अदायगी के तौर पर सांची रोड स्थित पेट्रोलपंप से लेकर अहमदपुर तिराहा तक हाईवे के सिर्फ सेंटर पर ही सफेट पट्टी की गई। इसके अलावा हाईवे का पूरा हिस्सा ज्यों का त्यों छोड़ दिया है। जिम्मेदार विभाग के अधिकारी मार्किंग को लेकर उदासीन दिखाई दे रहे हैं। शहरी क्षेत्र में एनएच पर अनेक तिराहे, स्कूल, कॉलेज और अस्पताल और बस स्टॉप हैं, वहीं मुख्य सड़कें भी इस हाईवे से जुड़ी हुई हैं। इन्हें ध्यान में रखकर हाईवे पर सुचारू आवागमन के लिए व्यवस्थित मार्किंग की जाना जरूरी है।

शहरी क्षेत्र में हाईवे पर मार्किंग नहीं होने से रात के समय वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे दुर्घटना का अंदेशा हमेशा बना रहता है। अंधेरे के मद्देनजर रिफ्लेक्टिव मार्किंग किए जाने की जरूरत होने की बात जानकार कह रहे हैं।

गायबहो गई पट्टी : महज एक पखवाड़े पहले एनएच के सेंटर पर मार्किंग कार्य किया गया था। चंद दिनों में ही यह मार्किंग हाईवे से गायब होने लगी है। स्थिति यह है कि कई जगहों पर तो सफेट पट्टी सड़क पर नजर ही नहीं रही है। मजेदार बात यह है कि हाईवे के सेंटर में घटिया निर्माण के चलते खराब सड़क पर लीपा-पोती के डाले गए डामर से भी मार्किंग के दौरान हुई सफेट पट्टी दब गई है। इससे रात में कुछ जगह पर हाईवे का सेंटर दिखाई देता है, तो कुछ जगह पट्टी गायब होने से हाईवे का सेंटर समझ में नहीं आता है।

1500भारी वाहन गुजरते हैं रात में: शहरी क्षेत्र से हाईवे पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में छोटे बड़े वाहनों की आवाजाही होती है। सिर्फ रात में ही करीब 1500 से बड़े भारी वाहन रोजाना इस हाईवे से गुजरते हैं। इसके अलावा हर दिन करीब 5 हजार वाहन शहर के बीच से हाईवे पर आवागमन करते हैं। हैवी ट्रैफिक के मद्देनजर इस हाईवे सुरक्षित सफर के लिहाज से यातायात संबंधित आवश्यक सूचना बोर्ड और पुख्ता मार्किंग की दरकार नजर रही है।

इस संबंध में कलेक्टर एमबी ओझा का कहना है कि एनएचएआई के अधिकारियों से हाइवे की मार्किंग को लेकर चर्चा की जा रही है।
-सेंटर एज लाइन
- पार्किंग इंस्ट्रक्शन
- स्टॉप लाइन मार्किंग
-रूट डायरेक्शन
- बस स्टॉप मार्किंग
- टिपिकल रोड मार्किंग एट रोटरीज
- सड़क के दोनों तरफ टे्रफिक पासिंग
- ओवर टैकिंग या नहीं
-स्पीड निर्देशन
- पैदल क्रॉसिंग
- ट्रैफिक लेन लाइन
- शब्द संदेश
रात में भी दिखे मार्किंग :- हाईवेपर मार्किंग ऐसी होना चाहिए, जिससे रात के समय में भी वाहन चालकों को आवागमन में आसानी हो। हेमंतदत्ता, व्यवसायी

हो रही खानापूर्ति : ''अभी मार्किंग में खानापूर्ति हो रही है। कई जगह तो सेंटर लाइन पट्टी धुंधली हो गई है। व्यवस्थित मार्किंग होना चाहिए।'' दीपक जैन, व्यवसायी

हर बिंदु का रखें ध्यान : ''शहर से गुजरे हाईवे पर व्यवस्थित मार्किंग होना चाहिए। पार्किंग, स्टॉप, स्पीड आदि टे्रफिक से जुड़े बिंदुओं पर मार्किंग होना चाहिए।'' सीके पटेल, यातायात प्रभारी
विदिशा। मार्किंग के अभाव में चौराहों पर से वाहन चालकों को उठाना पड़ता है जोखिम।