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भारतेंदु हरिश्चंद्र, दुष्यंत के योगदान को याद किया

7 वर्ष पहले
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हिंदी के विकास में योगदान पर चर्चा

हिंदीके साहित्यिक विकास में भारतेंदु हरिश्चंद्र और दुष्यंतकुमार की रचनात्मकता का महत्वपूर्ण योगदान है। यह कहना था डा. शीलचंद पालीवाल का। वे स्थानीय दादा-दादी की चौपाल में आयोजित परिचर्चा में मुक्तिबोध, भगवत रावत, दुष्यंत कुमार और भारतेंदु हरिश्चंद्र के कृतित्व पर प्रकाश डाल रहे थे। कार्यक्रम हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित था।

इस परिचर्चा में अनेक साहित्यकारों ने अपनी राय प्रस्तुत की। सुरेंद्र कुशवाह ने भारतेंदु पर एवं दिनेश श्रीवास्तव ने दुष्यंतकुमार पर समीक्षा आलेख पढ़ा। वरिष्ठ कवि आनंद श्रीवास्तव, सुदिन श्रीवास्तव, दिनेश मिश्र, शिव डोयले, उदय ढोली, राकेश मालवीय, डा. नवीन शर्मा, हरगोविंद मैथिल, गोविंद देवलिया, संजय दुबे, आशुतोष ठाकुर ने भी दुष्यंत की रचनात्मकता और प्रभाव पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि, लेखक ब्रज श्रीवास्तव ने किया।

दूसरे चरण में हिंदी साहित्य सम्मेलन की जिला इकाई का गठन किया गया। इसमें अध्यक्ष डा. शीलचंद पालीवाल, उपाध्यक्ष आनंद श्रीवास्तव, दिनेश मिश्र, महामंत्री ब्रज श्रीवास्तव चुने गए। कार्यकारिणी में सुदिन श्रीवास्तव, दिनेश श्रीवास्तव, सुरेंद्र कुशवाह, डा. नवीन शर्मा, उदय ढोली आदि चुने गए।