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टेस्टिंग में उलझा शहर का आरओबी

7 वर्ष पहले
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(विदिशा। खरी फाटक पर फाटक खुलने का इंतजार करते रहते हैं लोग।)
विदिशा। शहर के विकास कार्यों से जुड़ी सीएम की तमाम घोषणाओं का लाभ मिलने में लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। शहरवासियों को जाम की सबसे बड़ी समस्या से निजात दिलाने के लिए खरीफाटक पर आरओबी और आरयूबी बनाए जाने की सीएम की घोषणा को पूरा एक साल होने जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो हुआ है। हालांकि टेस्टिंग का कार्य चल रहा है। शहर की बड़ी आबादी हर दिन रेलवे फाटकों की वजह से जाम से जूझ रही है।
खरीदारी करने बाजार जाने वाले लोग, स्कूली बच्चे, नौकरी पेशा कर्मचारी, व्यापारी, किसान सहित हर वर्ग के लोग इस रेलवे गेट का उपयोग आने-जाने के लिए करते हैं, लेकिन ज्यादातर समय रेलवे गेट बंद होने से लोगों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। सबसे विषम स्थिति तब बनती है जब भारी तादाद में रेलवे गेट के दोनों ओर वाहन खड़े हो जाते हैं। जैसे ही रेलवे गेट खुलता है, दोनों तरफ से वाहन चालक निकलने के दौरान जाम में फस जाते हैं।
जाम भी ऐसा वैसा नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में वाहनों के पहिए काफी देर के लिए थम जाते हैं। इससे वाहनों में सवार लोगों को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि सीएम ने पिछले साल 12 दिसंबर को खरीफाटक रेलवे क्रासिंग पर आरओबी और आरयूबी की घोषणा की थी।
इस संबंध में सेतु परिक्षेत्र भोपाल डिवीजन के ईई एमपी सिंह का कहना है कि खरीफाटक रेलवे क्रासिंग के पास आरओबी और आरयूबी का निर्माण कार्य शुरू हो रहा है।
क्रासिंग के पास 900 मीटर लंबा बनना है आरओबी : खरी फाटक रेलवे क्रासिंग पर तीन लैग का आरओबी बनाया जाना प्रस्तावित है। इस आरओबी की कुल लंबाई अनुमानित 900 मीटर रखी जाना है। एक लैग पीतलमिल चौराहे की ओर, दूसरा लैग माधवगंज चौक की ओर तीसरा लैग गल्लामंडी की तरफ प्रस्तावित है। तीन दिशाओं में पहुंच मार्गों तक आरओबी बनने से शहरवासियों को अपने गंतव्य स्थानों तक जाने के लिए लंबा घूमकर नहीं आना जाना पड़ेगा।
35 करोड़ आएगी लागत : पीडब्ल्यूडी के सेतु परिक्षेत्र द्वारा आरओबी आरयूबी का निर्माण किया जाना है। निर्माण में 35 करोड़ की लागत का एस्टीमेट तैयार कर ईएफसी के लिए वरिष्ठ विभाग को भेजा था। आरयूबी की लागत 1.25 करोड़ आंकी गई है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद दो से अधिक निविदाएं निकाली गई। करीब एक महीने पहले ही इसके टेंडर स्वीकृत कर एजेंसी भी फिक्स हो चुकी हैं। अभी पीतलमिल के पास जमीन की टेस्टिंग का कार्य शुरू हुआ है।
30 फीसदी आबादी परेशान : रेलवे के खरीफाटक और सोठिंया फाटक का शहर की करीब 30 फीसदी आबादी आवाजाही में उपयोग करती है। सबसे ज्यादा खरीफाटक का उपयोग होता है। रेलवे रूट की व्यस्तता के चलते ये दोनों गेट अधिकतर बंद रहते हैं। गेट बंद के दौरान दोनों तरफ बड़ी संख्या में वाहनों की कतारें लग जाती हैं। इससे गेट खुलने के बाद भी जाम लग जाता है। कई बार तो घंटे से भी अधिक देर तक जाम लगता है। जाम लगने से सबसे अिधक समस्या लाइन पार स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को होती है। वे घंटों जाम में फंसें रहते हैं।