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मनुष्य का सच्चा मित्र परमात्मा : श्रोत्रिय
जीवात्माएकदेशीय है जबकि परमात्मा सर्वव्यापक सर्व शक्तिमान है। अत: वही सृष्टि की रचना करता है और चलाता है। मनुष्य का सच्चा मित्र केवल परमात्मा ही है। वही सबको मित्र की दृष्टि से देखता है। संसार के किसी भी पदार्थ में सुख नहीं है वे तो साधन मात्र है। सच्चा सुख केवल और केवल परमात्मा में ही है क्योंकि वही सुख स्वरूप है और अंर्तयामी है। उक्त उद्गार आर्य समाज के 96वें वार्षिकोत्सव में मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य डा. वेदप्रकाश श्रोत्रिय ने जीवात्मा एवं परमात्मा का संबंध प्रतिपादित करते हुए कही।
श्री आचार्य ने कहा कि मनुष्य बिना कर्म के रह ही नहीं सकता। अत: जब कर्म करना ही है तो वेदोक्त सतकर्म ही क्यों करें। ईश्वर को पुरुषार्थ के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है। सांयकालीन सत्र में अतिथि विद्वानों ने मानव जीवन की सार्थकता पर प्रकाश डाला। वार्षिकोत्सव का शुभारंभ बनारस से आए शतायु योागचार्य स्वामी सर्वानंद सरस्वती ने ओश्म ध्वज का आरोहण किया। हरियाणा से आई भजनोपदेशिका अंजलि आर्या ने डूबतो को बचाने वाली मेरी नैया है तेरे हवाले जैसे सुमधुर भजन प्रस्तुत किए। सभी कार्यक्रमों में सीताराम आर्य, आर्य मुनिजी, सुरेंद्रसिंह गुप्त, अनुराग श्रीवास्तव, श्रीमती श्रीवास्तव, वंदना आर्या, ठाकुर जगन्नाथसिंह आर्य, सूर्यप्रकाश आर्य, सुरेंद्रसिंह जादौन, आर्येंद्र आर्य, जयप्रकाश आर्य, पुरुषोत्तम आर्य, रामस्वरूप आर्य, आचार्य प्रमोदकुमार पाठक आदि प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आए आर्य समाज उपस्थित थे। आयोजन के दूसरे दिन 13 दिसंबर को चतुर्वेद शतकम यज्ञ एवं अतिथि विद्वानों के भजनोपदेश एवं वेद कथा की अमृत वर्षा होगी।
विदिशा। तीनदिवसीय वार्षिकोत्सव के शुभारंभ अवसर पर किया गया यज्ञ का आयोजन।