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वििदशा| एकयुग की आय

7 वर्ष पहले
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सेवा केंद्र पर प्रतियोगिताएं हुईं

विदिशा।प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय अरिहंत विहार कालोनी के सेवा केंद्र पर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। जिसमें विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। इस अवसर पर बच्चों के माता-पिता भी आश्रम में मौजूद थे।

इसी अवसर पर बीके सपना बहन ने आसन, प्राणायाम के साथ राजयोग मेडिटेशन के फायदे बताए। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि राजयोग मेडिटेशन अवश्य सीखे। यह योग तीन दिनों में नि:शुल्क सिखाया जाता है। अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया। केंद्र पर प्रत्येक
वििदशा| एकयुग की आयु 1250 वर्ष है। सृष्टि चक्र 5000 वर्ष का है। हर 5000 वर्ष में स्वयं परमपिता परमात्मा शिव अवतरित होकर आत्मा, परमात्मा एवं सृष्टि के आदि-मध्य एवं अंत का ज्ञान देेकर आदि सनातन देवी देवता धर्म की स्थापना करते हैं। वर्तमान समय में उसी गीता ज्ञान की पुनरावृत्त्ति हो रही है। उक्ताशय के उद्गार ब्रह्माकुमारी लक्ष्मीबहन ने व्यक्त किए। वे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र मुखर्जी नगर के सामने शिवलोक निवास में हिंदू धर्म के इतिहास की व्याख्या कर रही थी।

उन्होंने कहा कि गीता-ज्ञान कलियुग के अंत में पुरुषोत्तम संगम युग में दिया गया था कि जब भी धर्म की अत्यंत हानि होती है, मनुष्य मात्र आसुरी संप्रदाय के बन जाते हैं तभी परमपिता परमात्मा शिव अवतरित होते हैं। जिस मनुष्य के तन में वे प्रवेश करते हैं उनको वह प्रजापिता ब्रह्मा नाम देते हैं। जो उनके मुख से ज्ञान सुनते हैं उन्हें ब्राह्मण द्विज कहा जाता है। कलियुग के अंत में महाविनाश होता है, फिर सतयुग शुरू होता है। इसी अवसर पर ब्रह्माकुमारी रूक्मणि बहन ने विश्व की सभी आत्माओं की शांति के लिए राजयोग मेडिटेशन कराया। ब्रह्माकुमार रामदासभाई ने संस्था का परिचय दिया। संचालन वीरभाई ने किया। मुख्य अतिथि भाजपा विधायक कल्याणसिंह ठाकुर थे।

विदिशा। िहंदूधर्म के इितहास के बारे में दी गई जानकारी।

अवतरित होकर धर्म स्थापित करते हैं परमात्मा शिव