चार साल, करोड़ों खर्च, लाभ जीरो
कार्यालय संवाददाता| गंजबासौदा
चारसाल से चल रहे विद्युत सुधार कार्य के बाद भी खंभोंं पर लगे सर्किट बॉक्स और पैनलों की हालत नहीं बदली है। चार दशक पुरानी क्षतिग्रस्त बिजली की लाइनों और पैनलों को बदलने और सप्लाई को बेहतर बनाने शासन ने रिकंस्ट्रक्शन आरेंज पावर डेवलपमेंट रीफार्म प्रोग्राम योजना के तहत साढ़े नौ करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की थी। ताकि शहर के उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानियों से निजात मिले। साथ ही उनकी वोल्टेज समस्या भी दूर हो। बिजली विभाग ने शहर की सप्लाई लाइनों को सुधारने और बिजली चोरी रोकनेे के लिए 20 करोड़ रुपए की योजना बनाकर दी थी। योजना के तहत आधी राशि ही स्वीकृत हुई। इस राशि से बिजली विभाग को दो साल में यह कार्य पूरा करना था। लेकिन काम की धीमी गति के कारण योजना पर कार्य चार साल से चल रहा है। बिजली विभाग की माने तो अब भी केवल साठ प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है।
खुलेपड़े हैं ट्रांसफार्मरों पर बॉक्स
चारसाल से जारी बिजली सुधार कार्यक्रम के चलते नगर में ऐसे दर्जनों ट्रांसफार्मर लगे हैं जहां पैनल बॉक्स तथा सर्किट खुले हैं। कोई भी नागरिक या जानवर खुले तारों के संपर्क में सकता है। इन्हेें ठीक करने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। उनकी हालत जस के तस बनी हुई है।
2260 सिंगल फेज 509 थ्री फेज मीटर बदलने का था लक्ष्य
शहरमें २२६० सिंगल फेज पुराने मीटरों के स्थान पर २२६० नए इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने थे। ५०९ थ्री फेज मीटर लगाए जाना थे। इसके अतिरिक्त २५ हार्सपावर से ज्यादा वाले उपभोक्ताओं के ५५५ मीटरों पर मोडम लगाए जाने का लक्ष्य था। जो सीधे बिजली विभाग में स्थापित कंप्यूटरों पर रीडिंग दें सकें। चार साल में यह कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है।
नएलगे, पुराने नहीं हटाए
योजनाके तहत नगर के विभिन्न स्थानों पर लगे १०५ क्षतिग्रस्त बिजली के पोल बदलने का लक्ष्य था। जो वर्तमान में इस स्थिति में पहुंच चुके हैं कि आंधी, ठोकर या जानवरों की रगड़ से टूट कर गिर सकते हैं। इनमें कुछ तो बदल दिए गए कुछ अभी बदले जाना है। नए लगाने के बाद भी पुराने नहीं हटाए जा रहे हैं। इससे नागरिक परेशान है। जर्जर हो चुके ये खंभेे हादसे का कारण बन सकते हैं।
प्रयासके बाद भी नहीं रुक रही चोरी
बिजलीचोरी रोकने के लिए नंगे तारों के स्थान पर केबल लाइनें डाली गई हैं। इसके बाद भी मांग की तुलना में ४२ प्रतिशत बिजली चोरी जा रही है। चोरी को रोककर नुकसान को १५ प्रतिशत तक लाने के लक्ष्य को पूरा करने के संदर्भ में फिलहाल प्रयास सार्थक नहीं हो पाए हैं।
साठप्रतिशत काम हुआ
^आरएपीडीआरपीयोजना के तहत चल रहे कार्य का साठ प्रतिशत काम पूरा हुआ है। शेष कार्य जल्दी पूरा होने की संभावना है। विनोदबघेल, डीई आरएपीडीआरपी प्रोजेक्ट विदिशा
नौ करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी बिजली व्यवस्था में नहीं हो पाया सुधार, खुले पडे़ हैं पैनल।