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िशवरात्रि: भगवान शिव को प्रसन्न करने का िदन
विदिशा। आनेवाली 17 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। िशवार्चन और जागरण ही इस व्रत की विशेषता है।
इस पर्व पर रात्रि भर जागरण एवं शिव अभिषेक का विधान है। ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि को भगवान शिव करोड़ों सूर्य के समान प्रभाव वाले िलंग रूप में प्रकट हुए थे। पंडित विनोद शास्त्री ने बताया िक ज्योतिष के अनुसार इस तिथि में चंद्रमा सूर्य के समीप होता है। चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव है। भगवान शिव हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह विकारों से मुक्त करके परमसुख शांित और एेश्वर्य प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया िक शिव संहार शक्ति और तमोगुण के अधिष्ठाता हैं। शिव रात्रि पर अभिषेक का बहुत महत्व होता है। अभिषेक करने वाले भक्तों को मनवांछित फल प्राप्त होता है।
पंडित विनोद शास्त्री ने बताया िक जल से अभिषेक करने पर सुवृष्टि होती है। कुशा के जल से अभिषेक करने से रोग की शांति होती है। दही से अभिषेक करने पर गो पशुओं आदि का लाभ होता है। गन्ने के रस से अभिषेक करने पर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। दूध से अभिषेक करने पर संतान की प्राप्ति होती है। घी से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। सरसों के तेल से अभिषेक करने पर शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। भांग से अभिषेक करने पर मनवांछित फल मिलता है। शहद से सुख की प्राप्ति होती है।