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कॉलेज नहीं होने से छात्राएं छोड़ रहीं पढ़ाई

7 वर्ष पहले
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तहसीलका दर्जा प्राप्त करने वाले पठारी के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा कालेज के अभाव में उपलब्ध नहीं हो पा रही है। साधन संपन्न नागरिक अपने बच्चों को गंजबासौदा, सागर, विदिशा, भोपाल पढऩे के लिए भेज रहे हैं लेकिन साधन विहीन लोगों के सामने पढ़ाई छुड़वाना मजबूरी बना हुआ है। विशेषकर छात्राओं को अपनी पढ़ाई अधूरी छोडऩा पड़ रही है क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें घर से बाहर पढ़ने के लिए भेजने तैयार नहीं है।

स्थानीय पालकों का कहना है कि यदि पठारी में ही कालेज खुल जाए तो हम अपनी बच्चियों को 12वीं से आगे की शिक्षा दे सकेंगे। इससे हमारी सारी चिंताएं समस्याएं खत्म हो जाएंगी। लेकिन इस दिशा में शासन और प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गई है। यहां के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए गंजबासौदा, कुरवाई, खुरई, विदिशा, भोपाल, इंदौर आदि स्थानों पर पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें वहां पढ़ने केे लिए किराए के मकानों होस्टल का भारी किराया वसूल करना पड़ रहा है। कई विद्यार्थियों का समय और पैसा डेली अपडाउन में खर्च हो रहा है। निम्न तथा मध्यम आय के परिवारों के लिए इतना खर्च उठाना मुश्किल भरा काम है। लड़कियों के मामले में उनकी समस्या और बढ़ जाती है।

आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राएं सुबह जल्दी पहले पठारी आती है इसके बाद बस पकड़कर अन्य बड़े शहरों की ओर रवाना होते हैं। बच्चों के घर लौटने तक माता-पिता में चिंता बनी रहती है। ग्राम बंद्रावठा की प्रियंका, बबलेश तथा आरती का कहना है कि गांव से भोपाल के कालेज तक पहुंचने में अत्यंत कठिनाई होने के कारण ग्रेजुएशन बीच में ही छोडऩा पड़ा। वैसे भी हमारे माता-पिता हमें घर से बाहर पढऩे के लिए भेजने तैयार नहीं है। समाजसेवी राकेश दांगी का कहनाहै कि यदि शासन पठारी में एक महाविद्यालय खोल देता है तो इस क्षेत्र के करीब150 से भी अधिक गांवों के हजारों छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए परेशान नहीं होंगे। संजय रघुवंशी का कहनाहै कि शासन को चाहिए कि पठारी में छात्र-छात्राओं के उज्जवलभविष्य के लिए एक महाविद्यालय खोले। इससे क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं का समय रुपए बर्बाद होने से बच सके

उच्च शिक्षा विभाग को लिखा है पत्र

^पठारीमें छात्र-छात्राओं की परेशानियों को देखते हुए महाविद्यालय की स्वीकृति के लिए उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखा