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मानव जीवन में सत्य से बड़ा धर्म नहीं: शास्त्री
सत्यसे बड़ा कोई धर्म नहीं है। शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है। हम जितने भी धार्मिक अनुष्ठान करते हैं वे सभी तभी सार्थक होते हैं जब हम जीवन में सत्य को अपनाएंगे। यह बात स्थानीय आरएमपी नगर फस्र्ट में नर्बदेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन पं. ध्रुव कृष्ण शास्त्री ने कही।
उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि राजा हरिश्चंद्र ने ज्यादा पुराणों को नहीं पढ़ा है। सिर्फ एक ही चौपाई को अपनाया। इसका पालन करते हुए श्री हरि भगवान को प्राप्त किया। व्यक्ति के जीवन में ईमानदारी और सच्चाई बहुत जरूरी है। गलत तरीके से कमाया हुआ धन बुद्धि को विकृत कर देता है।
उदाहरण देते हुउ उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित ने जिस मुकुट को पहना था उसी से उनकी बुद्धि में विकृति पैदा हो गई थी। इससे उनके द्वारा एक संत का अपमान हुआ। उन्हें बदले में संत ने सात दिन में मृत्यु का श्राप दिया था।