धर्म की स्थापना के लिए आते हैं भगवान
विदिशा। शहरके रीठाफाटक स्थित श्री राधादेवी परिसर में श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन भगवान बालकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
कथा व्यास पं. संतोष शास्त्री ऋषि ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहाकि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का बढ़ावा होता है तब-तब भगवान इस धरती पर प्रकट होते हैं। धर्म की नए सिरे से संस्थापना करते हैं। श्री कृष्णावतार से पूर्व के अवतारों में भी भगवान ने भक्तों की भावना को पूरा किया। वे प्रत्येक अवतार में भक्तों की अभिलाषा को पूर्ण करते हैं। जन्मोत्सव पर वसुदेव और देवकी का अभिनय मोहन साहू और उनकी धर्मप|ी ने किया। नंदबाब और माता यशोदा के रूप में नीतेश भल्ला और उनकी धर्मप|ी ने आनंद लिया। ग्वालों के रूप में संतोष गुप्ता, जगदीश, अरविंद अग्रवाल, मोहरसिंह साहू, मांगीलाल साहू और अशोक साहू ने भाग लिया। गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग सतीष शर्मा ने लगाया।
भक्तभी भगवान को अवतार लेने कर देते हैं विवश: स्थानीयसत्संग भवन में जारी श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस मंगलवार को प्रवचनकर्ता वेदाचार्य पं. केशवकृष्ण शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण के अनन्य भक्तों की विस्तृत कथा सुनाई। महर्षि धर्मप|ी माता अनुसुइयाजी, भक्त श्रेष्ठ ध्रुवजी तथा भक्त प्रहलादजी की भगवत भक्ति पर कथा केन्द्रित रही। माता अनुसुइयाजी के पतिव्रत धर्म को उन्होंने परमेश्वर की भक्ति से भी श्रेष्ठ निरूपित किया। परम भक्त प्रहलाद ने अपनी भक्ति से अपने आराध्य भगवान श्री नृसिंह को प्रकट होने विवश कर दिया। इसी प्रकार अनुपम भक्त ध्रुवजी ने अपनी भक्ति से अजर-अमर होकर सर्वोच्च स्थायी स्थान प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की। इन जैसे भक्तों ने अपने भगवान को साक्षात दर्शन देने विवश कर दिया।
विदिशा। रीठाफाटक स्थित श्रीराधादेवी परिसर में चल रही कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इनसेट पं.संतोष शास्त्री।
विदिशा। सत्संग भवन में कथा सुनाते पं.केशवकृष्ण शास्त्री।