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धर्म हमें राग, द्वेष, मोह कम करना सिखाता है: मुनिश्री

4 वर्ष पहले
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विदिशा| धर्म हमें राग द्वेष और मोह को कम करना सिखाता है। यदि हमारे अंदर से राग द्वेष और मोह कम हो रहा हैं, तो समझना धर्म हमारे जीवन में आ रहा है। जो दूसरों को दुःख देता है , वह मन से कभी सुखी नहीं हो सकता।

ये दुनिया के लोग है.. जिन्दे में घर जलाते हैं और मरने के बाद फूल जलाते हैं। उक्ताशय के उद्गार मुनिश्री कुंथुसागर महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मन तो बहुत चंचल है। आप रह तो विदिशा में रहे हैं, लेकिन वह न जाने कहा-कहा दिल्ली- मुम्बई घूम आता है। संसार में अपना दुःख अपने मन की कथा व्यथा को सभी के सामने नहीं रखना चाहिए। आस्था और श्रद्धा वह दौलत हैं जो हर कही लुटाई नहीं जातीं। अपने दिल की बात किसी और को बताई नहीं जाती। किसी को गिराना बहुत सरल हैं, गिरते हुए को संभालना बहुत कठिन है। यही धर्म है।

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