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ज्ञान कोष का सागर है संस्कृत भाषा: चतुर्वेदी

Vidisha News - संस्कृत भाषा के साहित्य के कारण ही भारत जगदगुरु के गौरव से विभूषित था। संस्कृत भाषा ज्ञान कोष का सागर है। यह बात...

Dainik Bhaskar

Aug 19, 2016, 06:20 AM IST
ज्ञान कोष का सागर है संस्कृत भाषा: चतुर्वेदी
संस्कृत भाषा के साहित्य के कारण ही भारत जगदगुरु के गौरव से विभूषित था। संस्कृत भाषा ज्ञान कोष का सागर है। यह बात बैकुंठधाम स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के ज्ञान मंडप में श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर श्रीमद् भागवत गीता व्याख्यान माला द्वारा संस्कृत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर धर्माधिकारी गिरधरप्रसाद शास्त्री चतुर्वेदी ने कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद केएन शर्मा ने की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीराम चरित मानस व्याख्यान माला के अध्यक्ष पं. श्यामसुुंंदर चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय साहित्य का अध्ययन करने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि डा. रामजी रावत ने कहा कि विदेशों से जिज्ञासु संस्कृत अध्ययन के लिए भारत आ रहे हैं।अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि संस्कार की भाषा है संस्कृत। धर्म सम्राट स्वामी श्री करपात्री शोध संस्थान के अध्यक्ष डा. कपिल शास्त्री ने कहा कि विश्व की समस्त भाषाओं की जननी है संस्कृत भाषा। यह कम्प्यूटर के लिए सबसे उपयुक्त भाषा है। जिसका समृद्धशाली व्याकरण है।धर्मसंघ के सचिव डा. जीएस श्रीवास्तव ने कहा कि सभी धार्मिक साहित्य संस्कृत भाषा में हैं। अत: संस्कृत का प्रचार- प्रसार होना चाहिए। जसवीर सिंह चावला ने कहा कि संस्कृत देव भाषा कही जाती है।

प्रो. राजपाल वशिष्ठ, भृगु समाज के संरक्षक पं. महेंद्र शंकर आचार्य, पं. केशव चतुर्वेदी, विजयकुमार सक्सेना, पं. नरहरि चतुर्वेदी, पं. शिवचरण तिवारी आदि ने संस्कृत दिवस कार्यक्रम में भाग लेकर संस्कृत भाषा के प्रचार- प्रसार की अपील की। इस अवसर पर संस्कृत विद्वानों का सम्मान किया गया।

अध्यक्षता करते हुए केएन शर्मा ने संस्कृत भाषा पर अनेकों विदेशी दार्शनिकों एवं शिक्षाविदों के विचार प्रस्तुत किए। आभार पं. केशव चतुर्वेदी ने माना।

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