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\"सत्संग से सुख-शांति की प्राप्ति होती है\'

7 वर्ष पहले
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वििदशा|सत्संग करने,कथामृत पान करने, सज्जनों की संगति , भगवत परायण लोगों के साथ हरि चर्चा करने से मन के विकार दूर होते हैं। सद्ज्ञान एवं निर्मल भाव की प्राप्ति होती है। ये सभी प्रभुकृपा से ही प्राप्त होता है। उक्त विचार ग्राम थान्नेर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक मुन्नालाल शास्त्री कर रहे हैं।

श्री शास्त्री ने कहा कि स्वयं राधारानी ही हमें उंगली पकड़कर सत्संग में ले आती है। इस कलिकाल में जहां गृह क्लेश, भेदभाव, आत्म सुख का अभाव जहां प्राणी महसूस करता है वहां सत्संग से मानव जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार, संयमित आचरण, दूसरों के प्रति सद्भावना एवं सम्मान की भावना का प्राकट््य होता है।

इससे हम अपने परिवार में प्रेम, सौहाद्र्र एवं नई पीढ़ी के लिए प्रबल मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्त्रोत बनते हैं।