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‘आप’ के पास नहीं था विज्ञापन के लिए फंड, सोशल मीडिया को बनाया हथियार

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनावों में चौंका देने वाली जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ के पास प्रिंट मीडिया में विज्ञापन देने के लिए फंड नहीं था लेकिन उसके 10 मेंबर वाली टीम ने सोशल मीडिया को हथियार बनाकर बहुत हद तक इसकी कमी पूरी कर दी। सोशल मीडिया पर कैंपेन को हैंडल करने वाली ‘आप’ की टीम में आईआईटी बॉम्बे के 10 प्रोफेशनल्स थे। पिछले मंगलवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव में ‘आप’ ने 70 में से 67 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है।
कैंपेन के लिए बनाई रणनीति

‘आप’ के सोशल मीडिया कैंपेन से जुड़े दिव्यांक कहते हैं कि ‘हमने पिछले साल नवंबर में यह काम शुरू किया था। सबसे पहले ‘आप’ और बीजेपी के समर्थन वाले एक हजार अकाउंट खोजे और उनकी प्रकृति तथा मुद्दे समझने की कोशिश की। इतने ही अकाउंट उन लोगों के भी खंगाले गए जो न्यूट्रल थे यानी जिनका बीजेपी और आप से कुछ लेना देना नहीं था।’
दिव्यांक बताते हैं कि ये काम करने के बाद उन मुद्दों को ‘आप’ के 70 प्वाइंट वाले घोषणापत्र में शामिल किया गया। इन चुनिंदा मुद्दों मे बिजली, पानी, वाई-फाई तथा महिला सुरक्षा जैसे विषय शामिल थे। ये काम करने लिए एक फॉमूर्ला भी बनाया गया था। केजरीवाल की टीम ने फेसबुक, टि्वटर, व्हाट्स एप, सोशल मीडिया एप मैंगो का उयोग किया। मैंगो को तो आम आदमी का रेडियो कहा जाने लगा। वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे ‘फ्रेंकली स्पीकिंग’ के जरिए इस कैंपेन को और बूस्ट किया गया। और तो और मतदान वाले दिन जब तमाम नेता सांस थामे स्थिति पर नजर रखे हुए थे उस दिन भी केजरीवाल ने एक व्यंग्य वेबसाइट को दिए अपने इंटरव्यू के अंश ट्वीट किए जिसमें उनके स्टायल पर टिप्पणी की गई थी। चुनाव जीतने के बाद पत्‍नी सुनीता केजरीवाल को गले लगाते अरविंद केजरीवाल का फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।