(फोटोः कांग्रेस विधायक आसिफ मोहम्मद खान और मतीन अहमद)
नई दिल्ली. दिल्ली में बीजेपी को सरकार बनाने का मौका देने संबंधी शीला दीक्षित के बयान को लेकर कांग्रेस में बगावत के सुर सुनने को मिल रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान भले ही उनके बयान से किनारा कर चुका हो, लेकिन सीलमपुर के विधायक मतीन अहमद और ओखला के आसिफ मोहम्मद खान ने शीला के बयान का समर्थन किया है। ऐसे में इस बात के आसार भी दिखाई देने लगे हैं कि विधानसभा में ये विधायक मतदान से गैरहाजिर रह कर भाजपा को सरकार बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं।
इन दो विधायकों से पहले गुरुवार को चांदनी चौक के विधायक प्रह्लाद सिंह साहनी ने भी दीक्षित के बयान का समर्थन किया था। हालांकि, शुक्रवार को वह 'नो कॉमेंट' की मुद्रा में आ गए थे। इधर, बीजेपी सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि आम आदमी पार्टी (आप) के छह विधायक भी लगातार संपर्क में हैं।
शीला के बयान में गलत क्या हैः मतीन
मतीन अहमद ने कहा, 'जो लोग शीला दीक्षित को कांग्रेस से निकालने की मांग कर रहे हैं, उन्हें मेरे ऊपर भी कार्रवाई करनी चाहिए। मैं उनके विचार का समर्थन कर रहा हूं, इसलिए मुझे भी पार्टी से निकाल दें।' मतीन ने कहा कि 'शीला के बयान में गलत क्या है? मैं भी महसूस करता हूं कि अगर बीजेपी सरकार बना सकती है, तो उसे जरूर बनाना चाहिए। कई महीनों से भ्रम की स्थिति है, यह साफ होना जरूरी है।' ओखला विधायक आसिफ मोहम्मद खान ने भी कहा, 'शीला ने जो कहा, उसमें कुछ भी गलत नहीं है। अगर बीजेपी के पास संख्याबल है, तो उसे सरकार बनानी चाहिए।' बता दें कि 67 सीटों की दिल्ली विधानसभा में बीजेपी के 29 विधायक हैं।
बीजेपी के मददगार बनेंगे या नहीं, स्पष्ट नहीं
हालांकि दोनों विधायकों ने यह साफ नहीं किया है कि वे बीजेपी को सरकार बनाने में मदद करेंगे या नहीं। हालांकि, शीला के बयान पर कांग्रेस आलाकमान ने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी थी उसके बावजूद इस तरह के बयान के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस को इन दोनों विधायकों के बयान राजनीतिक रूप से इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं क्योंकि दोनों अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। कांग्रेस का ऐसे मौकों पर रुख रहा है कि 'सांप्रदायिक शक्तियों को हम किसी भी कीमत पर सरकार में नहीं आने देंगे।' इन दोनों विधायकों के अलावा साहनी के विधानसभा क्षेत्र में भी मुस्लिम आबादी बड़े पैमाने पर है। दिल्ली की राजनीति में अचानक आया यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अटकलों के चलते विधायकों की चिंता बढ़ रही है और ऐसे में शीला के बयान को भी जोड़ लें, तो यह बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
क्या है दिल्ली का गणित-
दिल्ली की 70 सदस्यों वाली विधानसभा में फिलहाल 67 विधायक हैं और तीन सीटें बीजेपी विधायकों के सांसद बनने से खाली हैं। वर्तमान में भाजपा खेमे के 29 (अकाली दल का एक मिला कर) विधायक हैं। बहुमत के लिए 5 विधायक और चाहिए। आप से निकाले गए विनोद कुमार बिन्नी और रामवीर शौकीन बीजेपी को समर्थन करने के संकेत दे चुके हैं। जेडीयू विधायक शोएब इकबाल भी भाजपा का समर्थन कर सकते हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस के दो विधायक मतदान से गैरहाजिर रहें तो भाजपा बहुमत साबित कर सकती है।
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