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नमाज के पाबंद अहमद पटेल

5 वर्ष पहले
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कांग्रेस नेता अहमद पटेल एक लंबे दौर तक देश के सबसे शक्तिशाली लोगों में शुमार किए जाते रहे हैं। जो बात कम लोग जानते हैं, वह यह है कि अहमद पटेल पांचों वक्त के नमाजी हैं, चाहे कोई भी परिस्थिति हो। दिल्ली में अपने दायरे की लगभग हर छोटी-बड़ी मस्जिद में नमाज पढ़ चुके हैं, राष्ट्पति भवन में बनी मस्जिद से लेकर संसद के सामने बनी मस्जिद तक। बल्कि मस्जिदें बदलते रहना उनका शौक है। चाहे खुद या परिवार में किसी की भी सेहत ठीक न हो, लेकिन नमाज कार्यक्रम में कोई फर्क नहीं आता। जो कांग्रेस के बाकी मुसलमान चेहरे हैं, वो नमाज के उतने पाबंद नहीं माने जाते हैं।
डॉन से राष्ट्रपति!
अगला राष्ट्रपति कौन होगा? कोई शक नहीं कि अभी समय बाकी है, प्रणब दा का कार्यकाल अगले साल जुलाई तक का है। लेकिन संभावित नामों की तश्तरी काफी समय से घूम रही है। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से लेकर नारायण मूर्ति और कुछ राज्यपालों का नाम चल रहा है। एक नया नाम उभरा है सुपर स्टार रहे अमिताभ बच्चन का। लॉजिक? लॉजिक ये कि गुजरात के ब्रांड एम्बेसेडर रहे हैं, मोदी के निकट हैं, कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है, 10 जनपथ से थोड़ी खटपट है, और कांग्रेस उनका विरोध नहीं कर पाएगी। है ना सुपर हिट फार्मूला?
असली हैव नॉट्स की राजनीति
बृंदा करात अब पूर्व सांसद हैं। त्रिपुरा से खाली होने वाली सीपीएम की एक सीट से बृंदा करात को राज्यसभा में लाया जा सकता है। लेकिन सीताराम येचुरी का कार्यकाल भी खत्म होने वाला है। अब बंगला, आने-जाने का खर्चा वगैरह जो भी सुविधाएं एक सांसद को मिलती हैं, उनकी ज्यादा जरूरत किसे है- पार्टी महासचिव को या बृंदा करात को- यह फैसला अब सीपीएम को करना है। और हैव नॉट्स की स्थिति में आकर राजनीति करना इतना आसान भी नहीं है।
वर्दी वाले की बंसी
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के विशेष आयुक्त हैं मुकेश चंद्र। दिल्ली के ही स्व. मुकेश चंद्र की भांति वह महान गायक तो नहीं हैं, लेकिन बांसुरी वादन के बहुत बड़े कलाकार हैं। शौक तो बचपन से ही था, लेकिन अभ्यास हुआ 2003 में गोवा में तैनाती के दौरान। वैसे वर्दी वाले हैं, लेकिन मन कलाकार वाला है। वह चाहते हैं कि कभी कैदियों को बांसुरी बजाकर सुनाएं।
मिलेगा किनारा!
कर्नाटक भाजपा के नेता होते थे लहर सिंह। यूपीए राज के दौरान उन्होंने एक आडवाणी विरोधी पत्र लिख दिया था, और उस पर भाजपा की सदस्यता से निलंबित कर दिए गए थे। अब अमित शाह ने वह निलंबन समाप्त कर दिया है। लहर सिंह कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के नजदीकी थे। येदियुरप्पा के खिलाफ मामले अभी चल रहे हैं, लिहाजा उनका पुनर्वास तो मुश्किल है, लेकिन हाल ही में संसद भवन के सेंट्रल हॉल में उनकी प्रधानमंत्री से भेंट हो चुकी है। अब चर्चा यह है कि अमित शाह की नई टीम में लहर सिंह जरूर मझधार छोड़कर किनारे पर बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
घर की याद
केशरीनाथ त्रिपाठी उत्तरप्रदेश के स्पीकर रह चुके हैं और अभी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं। घर-परिवार भी इलाहाबाद में है और मन भी इलाहाबाद में है। उधर कोलकाता से इलाहाबाद की उड़ान रोजाना नहीं है। एक फ्लाइट वाराणसी तक आती है, लेकिन वाराणसी से इलाहाबाद तक का सड़क मार्ग भी ठीक नहीं है। लिहाजा त्रिपाठी जी कोलकाता से राजधानी एक्सप्रेस पकड़ते हैं, और रात दो बजे इलाहाबाद पहुंच जाते हैं। आधी रात को? लेकिन त्रिपाठी जी ट्रेन में झपकी मार कर ही काम चला लेते हैं।
जीवन चरित का चलन
मॉय कंट्री, मॉय लाइफ याद है आपको? वही आडवाणी जी की आत्मकथा। बहरहाल उसके बाद से आत्मकथा और जीवनी लेखन का चलन ही चल पड़ा है। प्रणब मुखर्जी, शरद पवार, अर्जुन सिंह, नटवर सिंह, आर.के. धवन, टी.वी. राजेश्वर, जयराम रमेश और सलमान खुर्शीद भी। नरसिंहराव ने एक आत्मकथात्मक उपन्यास लिखा था। अब यही चस्का बॉलीवुड को भी लग गया है। शत्रुघ्न सिन्हा, सलमान खान, प्राण, राजेश खन्ना, प्रेम चोपड़ा, मदनमोहन, मोहम्मद रफी, स्मिता पाटिल, वाडिया रहमान- तमाम लोगों की आत्मकथाएं और जीवनियां सामने आ रही हैं।
मुलाकात की कोशिश
एक बड़ा औद्योगिक घराना अरविंद केजरीवाल और कंप्टीशन कमीशन ऑफ इंडिया के नए चेयरमैन डीके सीकरी से मिलने के लिए काफी समय से कोशिश करता आ रहा है, लेकिन अभी तक उसे सफलता नहीं मिल सकी है।
और पीएम ताड़ गए
नए साल के मौके पर, जब पीएमओ के सारे अधिकारी एक साथ पीएम से मिलने गए थे, तो प्रमुख सचिव नृपेन्द्र मिश्रा बहुत धीमे चलते हुए पहुंचे। पीएम तुरंत ताड़ गए और उन्होंने नृपेन्द्र मिश्रा से उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की।
एजीपी के सलाहकार
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एस.के. अग्निहोत्री बोफोर्स घोटाले के शीर्ष गवाह थे। हाल ही में वह असम गण परिषद के सलाहकार बन गए हैं। असम गण परिषद के साथ उनका संबंध तब से है, जब उन्होंने और केपीएस गिल ने असम समझौता करवाया था।
अभी की स्थिति तो ये है..
आगे पता नहीं। सोनिया गांधी और राम जेठमलानी संवाद अभी कायम है। हो सकता है अरुणाचल के मामले में जेठमलानी कांग्रेस सरकार की वकालत करें।
कॉलेजियम के ऊपर.....
वरिष्ठ न्यायाधीश इक़बाल अहमद अंसारी जो मूल रूप से गोवाहाटी हाई कोर्ट के जज हैं इनका नाम सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम और भारत सरकार द्वारा पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए चयनित किया गया और नियमानुसार बिहार सरकार को अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए भेजा गया। लेकिन बिहार सरकार ने इसे अभी तक जारी नहीं किया है। बाकि सारे हाई कोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की सारी औपचारिकताएं पूरी हो गयी और यही एक अटक गया। न्यायाधीश इक़बाल अहमद अंसारी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं।
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