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भारत-म्यांमार सीमा: 20 रुपए में करें यहां से विदेश यात्रा;पार करना है केवल एक आयरन ब्रिज

3 वर्ष पहले
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मणिपुर के इंफाल में पांच दिन तक चले इंडियन साइंस कांग्रेस में शामिल होने आए 50 फीसदी से ज्यादा डेलीगेट्स और विज्ञानियों ने बिना पासपोर्ट वीजा विदेश यात्रा भी की। इतना ही नहीं, जिन्होंने विदेशी जमीन पर 5 हजार रुपए की भी शॉपिंग की वे एक लाख कीमत का सामान लेकर वापस लौटे। चौंकिए मत। इंफाल से करीब 110 किमी दूर भारत-म्यांमार सीमा है, यहां मणिपुर के मोरेह कस्बे से स्थानीय नदी पर बने एक छोटे मगर ऐतिहासिक आयरन ब्रिज से गुजरकर सीधे म्यांमार पहुंचा जा सकता है।

 

 

- विशेष बात यह है कि म्यांमार सीमा में प्रवेश करने के बाद करीब तीन किलोमीटर आगे तामू नामक कस्बा है, यहां बौद्ध मोनेस्ट्री व अन्य स्थानों पर घूमने-फिरने के अलावा नानफरलोन बाजार से खरीदारी भी की जा सकती है। मोरेह पुलिस स्टेशन से बाकायदा मामूली फीस (करीब 20 रुपए प्रति व्यक्ति) देकर एक परमिट मिलता है, जिसमें पहचान के तौर पर आधार या मतदाता पहचान पत्र दिखाना पड़ता है और म्यांमार सीमा में इमीग्रेशन पोस्ट पर जांच के बाद भारतीय नागरिकों को आगे जाने देते हैं।

- भारत-म्यांमार के बीच दोस्ती की संधि के तहत सीमा के करीब तामू कस्बे तक आने जाने के लिए पोसपोर्ट व वीजा की जरूरत नहीं है, हालांकि 20 किमी बाद म्यांमार में आगे बढ़ने के लिए पासपोर्ट व वीजा की जरूरत पड़ती है।

 

5 हजार रुपए लेकर जाइए व एक लाख रुपए का सामान लाइए
- भुवनेश्वर से कांग्रेस में हिस्सा लेने आए सनत कुमार द्विवेदी ने कहा, ‘मैं तो तय करके आया था कि अपना सेशन खत्म होने के बाद एक दिन म्यांमार जरूर जाऊंगा, इतनी आसानी से विदेश जाने का शायद कोई दूसरा रास्ता नहीं है।’ सामान के कई थैले दिखाती हुई जयपुर की नेहा ने कहा, ‘यहां सामान का बिल लेने के बाद लखपति होने जैसा अहसास होता है। मैंने दो नेकलेस सैट, दो लेडीज स्कर्ट, एक मफलर, क्लिप व कुछ अन्य चीजें लीं और मेरा बिल म्यांमार की करेंसी में 49500 क्याट का बना लेकिन उसने कहा कि वह भारतीय रुपए भी लेते हैं और मुझे केवल 2475 रुपए देने हैं।’ ऐसा ही अनुभव का दिल्ली से आए राकेश अंदानिया का भी था, उन्होंने कहा कि ‘मैंने एक इलेक्ट्रॉनिक शॉप से एक दूरबीन, पावर बैंक और एक ड्रोन किस्म का खिलौना खरीदा और मेरा बिल एक लाख 31 हजार दो सौ क्याट बना। मैंने दुकान के करीब एटीएम से करेंसी निकालने की कोशिश की तो उसमें अधिकतम दो लाख क्याट निकालने का विकल्प मौजूद था, जिसमें 15 नोट 10 हजार वाले, कुछ पांच हजार और बाकी एक हजार व 500 क्याट के निकले। नोट बेहद ढीले-ढाले थे, इसलिए वहां के एटीएम में एक थैली भी रखी होती है कि आप नोट उसमें संभालकर निकलें। दिलचस्प ये कि मैंने दो लाख क्याट की शॉपिंग की और मोबाइल में 10,199 रुपए विड्राल का मैसेज मिला।’

 

डर जैसा माहौल नहीं, यहां के लोग भी मणिपुर के भारतीयों जैसे ही हैं

 

- चेन्नई की जयप्रकाश जयंती ने कहा, ‘करीब तीन साल पहले यहां सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी, इसके अलावा रोहिंग्या विवाद, घुसपैठियों, उग्रवादियों के हमले व अशांति की खबरें अक्सर आती थीं, इसलिए डर भी लग रहा था लेकिन यहां पुलिस व सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी तो नजर आई पर डर जैसा माहौल नहीं है। यहां के लोग भी मणिपुर से मिलते जुलते भारतीयों जैसे ही लगते हैं, कई तो तमिल व हिंदी बोलने-समझने वाले भी मिले।’ मोरेह पुलिस स्टेशन से सुबह 7 से शाम 4 बजे तक ही म्यांमार जाने का परमिट जारी होता है। कई लोग रहते मोरेह कस्बे में हैं और म्यांमार की दुकान में काम करने जाते हैं।

 

 

 

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