दिल्ली में बन रहे लदन ग्रेट स्मॉग जैसे हालात, 64 साल, पहले जहरीली हवा से मारे गए थे 4000 से ज्यादा लोग

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर लगातार आठ दिन से स्मॉग (पॉल्यूशन और धुंध) से परेशान है। पॉल्यूशन तय मानकों से 10 गुना बढ़ चुका है। एक्सपर्ट्स ने आगाह किया है कि अगर हालात जल्द न सुधरे तो लंदन में 1952 में हुए ग्रेट स्मॉग जैसी स्थिति बन सकती है, जिसके चलते वहां चार हजार लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली सरकार ने राजधानी में पांच दिन कंस्ट्रक्शन, डिमोलिशन बंद करने समेत 10 बड़े फैसले लिए हैं। 14 Q&A में पढ़ें: दिल्ली में एकाएक हालात इतने खराब क्यों हो गए...

1. दीपावली के बाद दिल्ली में आखिर क्यों बढ़ा पॉल्यूशन?
- पटाखे:
चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक, पटाखों से सबसे ज्यादा पॉल्यूशन फैलता है। सांप गोली, बम की लड़ी, अनार और चकरी जैसे पटाखे 2000 गुना ज्यादा पार्टिकुलेट मैटर छोड़ते हैं। एक पटाखे से 464 सिगरेट जितना धुआं निकलता है।
- धुंध ने रोका धुआं: CSE साइंटिस्ट विवेक चट्टोपाध्याय का कहना है कि पटाखों का धुआं धुंध के कारण हट नहीं पाया। हवा अभी फैल नहीं रही है।
- हवा का रूख जिम्मेदार: दिवाली के दिन हवा की एवरेज स्पीड 1.3 मीटर/ सेकंड थी। पिछले साल यह 3.4 मीटर/ सेकंड थी। हवा की रफ्तार धीमी है। अगले कुछ दिन ऐसा ही रहेगा।
- पराली, लकड़ी और कोयला: पंजाब-हरियाणा में फसलों का कचरा जलाने और कोयले-लकड़ी के धुएं ने दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन बढ़ाया। पंजाब में 320 लाख टन फसल का कचरा जलने से और भलस्वा डंपिंग ग्राउंड में आग से दिल्ली-एनसीआर में धुंध बढ़ी।
2. कितना बढ़ा पॉल्यूशन?
- हवा में दो तरह के पीएम होते हैं।
- पहला: PM 2.5 होना चाहिए 60 g/m3। लेकिन दिल्ली में अभी यह 590 g/m3 है। यानी सामान्य से 10 गुना ज्यादा।
- दूसरा: PM 10 होना चाहिए 100 g/m3। लेकिन दिल्ली में अभी यह 950 g/m3 है। यानी सामान्य से 9.5 गुना ज्यादा।
3. हालात कब बदतर हो गए?
- आठ दिन से दिल्ली में स्मॉग है। हवा जहरीली हो गई है। रविवार का दिन सबसे पॉल्यूटेड रहा।
- 200 मीटर तक देखना मुश्किल हो रहा था। इन दिनों दिल्लीवासियों ने 17 साल की सबसे ज्यादा धुंध देखी।
4. किस खतरनाक स्तर की तरफ जा रही है दिल्ली? लंदन-बीजिंग में क्या हुआ था?
- सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट (CSE) की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता रॉय चौधरी के मुताबिक, ‘"लंदन में 1952 में स्मॉग की वजह से 4 हजार लोगों की मौत हो गई थी। तब SO2 हाई लेवल पर था। पीएम लेवल 500 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर था।’’
- ‘‘यहां SO2 भले ही उतना ज्यादा न हो, लेकिन दिवाली पर हवा में कई तरह की जहरीली गैसों का स्तर बढ़ा है। कुल मिलाकर अगर पॉल्यूशन का यह स्तर बरकरार रहा तो दिल्ली में भी सांस से रिलेडेट बीमारियों के कारण लोगों की मौत हो सकती है।’’
- बीजिंग में इसी साल फरवरी में इतना पॉल्यूशन बढ़ा था कि रेड अलर्ट जारी करना पड़ा।
5. पीएम कणों का हमारी बॉडी पर क्या असर पड़ता है?
- हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर सांस लेने के दौरान शरीर में पहुंचते हैं।
- पीएम-2.5 और पीएम-10 कण फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। ये हवा में मौजूद जहरीले कैमिकल्स को शरीर में पहुंचाते हैं। ये केमिकल फेंफड़े, हार्ट को नुकसान पहुंचाते हैं।
- पीएम-10 कणों का असर खांसने, छींकने से कम हो जाता है।
6. दिल्ली सरकार ने क्या कदम उठाए?
- पॉल्यूशन से लड़ने के लिए सरकार ने 10 बड़े फैसले लिए।
- राजधानी में पांच दिनों के लिए कंस्ट्रक्शन और डेमोलिशन को बंद कर दिया है। लोगों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी गई है।
- तीन दिन के लिए स्कूल बंद रहेंगे। जनरेटर नहीं चलेंगे। ऑड-ईवन फिर से लागू करने पर विचार हो रहा है।
- ऑर्टिफिशियल रेन कराने पर केंद्र से बात हो रही है।
- पत्तियां जलाने पर सख्ती से रोक लगा दी गई है। निगरानी के लिए मोबाइल एप जारी होगा। एमसीडी को कूड़े के ढेरों में लगी आग फौरन बुझाने के निर्देश दिए गए हैं।
- सड़कों पर पानी का छिड़काव होगा। दिल्ली में किसी भी वक्त ट्रकों के घुसने पर पाबंदी।
- बदरपुर पावर प्लांट बंद रहेगा। प्लांट से फिलहाल राख उठाने पर पाबंदी लगा दी गई है।
7. कब निजात मिलेगी?
- वेदर डिपार्टमेंट के मुताबिक, अच्छी बारिश और तेज हवा चलने से ही स्मॉग से निजात मिल सकती है।
- 12 नवंबर तक बारिश के आसार नहीं हैं। हालांकि, सोमवार को हवा चलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली में ठहर चुके स्मॉग से कुछ राहत मिल सकती है।
8. अब तक किसने क्या कहा?
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्री:
अनिल माधव दवे ने कहा- इस हालत के लिए 80% दिल्ली सरकार जिम्मेदार है।
- दिल्ली सरकार: सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा- दिल्ली पहले से ही पॉल्यूटेड है। पॉल्यूशन पंजाब-हरियाणा की वजह से हो रहा है।
- नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल: NGT ने पॉल्यूशन को लेकर केंद्र-दिल्ली सरकार को फटकार लगाई। स्टेटस रिपोर्ट मांगी।
- सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट: CSE ने कहा- हालात अभी नहीं सुधरे तो फिर संभालना मुश्किल हो जाएगा।
- एक्सपर्ट्स: दिल्ली ही 80% दोषी। पंजाब-हरियाणा में फसल के जलते कचरे की पॉल्यूशन बढ़ाने में भूमिका महज 20%।

9. सरकार ने कहां की लापरवाही?

- नहीं माने आदेश: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश नहीं माने। कोर्ट और एनजीटी ने पॉल्यूशन पर एक साल में केंद्र और दिल्ली समेत राज्य सरकारों को कई निर्देश दिए। लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ।
- पटाखों पर रोक: 16 अक्टूबर 2015 को कोर्ट ने सरकार को विज्ञापन निकालकर लोगों को पटाखे नहीं चलाने के लिए जागरूक करने को कहा। हकीकत ये है कि सरकार ने विज्ञापन जारी नहीं किया।
- फसल का कचरा जलाने पर रोक: 20 अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के फसल का कचरा जलाने पर रोक के लिए विज्ञापन निकालने को कहा। लेकिन यूपी, हरियाणा और पंजाब में सरकार किसानों को जागरूक करने में नाकाम रही।
- 15 साल पुरानी गाड़ियों पर बैन: 18 जुलाई 2016 को एनजीटी ने कहा कि 15 साल पुरानी गाड़ियां पहले हटेंगी। लेकिन 90 हजार ट्रक समेत लाखों पुरानी डीजल गाड़ियां दिल्ली में दौड़ रही हैं।
10. बीजिंग-लंदन से क्या सबक ले सकते हैं?
- बीजिंग में फरवरी में पॉल्यूशन बढ़ा। नौबत ऐसी आ गई कि रेड अलर्ट जारी करना पड़ गया। इसके बाद कार्बन इमिशन कम करने पर जाेर दिया गया।
- चीन ने 2017 तक कोयले के इस्तेमाल में 70% कटौती करने और 2020 तक कोयला मुक्त होने का टारगेट बनाया है।
- इसी के साथ चीन ने क्लाउड सीडिंग पर जोर दिया। यह आर्टिफिशियल बारिश के लिए है। इसमें सिल्वर आयोडाइड जैसे केमिकल से भरे गोले प्लेन के जरिए दागे जाते हैं। इससे आसमान पर बादलों में मौजूद पानी बरस जाता है। चीन ने यह टेक्नोलॉजी फरवरी में भारत को भी ऑफर की थी।
- इसी तरह 1952 के ग्रेट लंदन स्मॉग के बाद यूके ने दो कड़े ग्रीन कानून बनाए। इसके तहत पॉल्यूशन रोकने के लिए सख्त नियम बनाए गए। वहीं, कोयले की बजाय नेचुरल गैस के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। इस तरह कार्बन इमिशन काबू किया गया।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें : दुनिया के सबसे पॉल्यूटेड शहरों में कहां है दिल्ली? दिल्ली के लोग क्या कर रहे हैं? और नासा ने क्या कहा?
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