लखनऊ. केंद्र सरकार वाराणसी से कोलकाता के बीच गंगा नदी पर एम्फीबियन या सी-एयरक्राफ्ट (हवा और पानी पर चलने वाला) चलाने पर विचार कर रही है। साथ ही देशभर की नदियों में 111 वॉटरवेज को डेवलप करने का टारगेट रखा गया है। इससे पहले गोवा में उतर चुका है सी-प्लेन, और क्या है रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री प्लानिंग...
- इससे पहले 23 मई 2015 को गोवा में 9 सीटर सी-प्लेन की ट्रायल लैंडिंग हुई थी। वहां टूरिज्म के मकसद से यह प्रोजेक्ट लाया गया है।
- मंगलवार को लखनऊ में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी ने बताया, ‘कोलकाता-वाराणसी के बीच एयरक्राफ्ट चलने से ट्रांसपोर्ट सस्ता हो जाएगा।’
- ‘वाराणसी से लेकर हल्दिया तक वाटरड्राफ्ट बनाए जा रहे हैं। इससे गंगा में हमेशा कम से कम 3 मीटर पानी रहेगा।'
- 'हमारा मकसद नदियों में वॉटरवेज को डेवलप करना है। संसद से गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी में 5 वॉटरवेज बनाने की मंजूरी मिल चुकी है।'
- 'हमारा टारगेट देश में ऐसे 111 वॉटरवेज डेवलप करना है। इससे कॉस्ट 15 से 20 पैसे प्रति किलोमीटर आएगी।'
- 'इन वॉटरवेज से बांग्लादेश और म्यांमार से बिजनेस में मदद मिलेगी।'
- 'इसके अलावा 620 किमी लंबा फरक्का-पटना वॉटर वे अगले 6 महीने में तैयार हो जाएगा।'
- 'रामेश्वरम से श्रीलंका तक समंदर के अंदर अंडरग्राउंड टनल बनाने का भी प्लान है। '
- 'गंगा नदी को साफ करने का नरेंद्र मोदी सपना अगले 5 साल में पूरा हो जाएगा।'
दो साल में चलेंगी इलेक्ट्रिक बाइक, कार
- गडकरी के मुताबिक एन्वायरमेंट बचाने के लिए अगले दो साल में इलेक्ट्रिक बाइक, बस और कार चलाने का प्लान है।
- ये गाड़ियां सैटेलाइट और रॉकेट में यूज होने वाली लीथियम-आयन बैटरी से चलेंगी।
- बता दें कि इलेक्ट्रिक बसें संसद में चलाई जा रही हैं।
- गडकरी ने कहा, 'देश में लाइसेंस बनाने और पॉल्यूशन चैकिंग के लिए 5 हजार इंस्टीट्यूट बनाए जाएंगे। इससे करीब एक लाख लोगों को इम्प्लॉइमेंट मिलेगा।'
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