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BRICS में भारत का जोर आतंकवाद रहेगा, चीनी प्रेसिडेंट के सामने मोदी उठा सकते हैं मसूद अजहर का मुद्दा

5 वर्ष पहले
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पणजी. नरेंद्र मोदी ने चीन के प्रेसिडेंट से शनिवार को मुलाकात की। दो दिन की ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए शी जिनपिंग गोवा में हैं। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में आतंकवाद का मुद्दा अहम रहा। इस दौरान मोदी ने जिनपिंग से कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर मतभेद की गुंजाइश नहीं है। बाद में मोदी ने ट्वीट कर कहा- 'जिनपिंग के साथ मीटिंग फायदेमंद रही।' अजहर को बैन करने को लेकर चीन से जारी रहेगी बातचीत...
- मोदी-जिनपिंग की मुलाकात के बाद फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन विकास स्वरूप ने इसकी जानकारी दी।
- विकास स्वरूप ने बताया, 'दोनों नेताओं ने आतंकवाद पर अहम चर्चा की और इस बात पर राजी हुए कि इससे मुकाबले के लिए साझा कोशिशें बढ़ाने की जरूरत है।'
- 'पीएम मोदी ने जिनपिंग से कहा कि दोनों ही देश आतंकवाद के शिकार हैं और इससे पूरे रीजन में मुश्किल खड़ी हो सकती है।'
- 'चीनी प्रेसिडेंट ने कहा कि दोनों देशों को सिक्युरिटी डायलॉग और पार्टनरशिप को मजबूत करना चाहिए। दोनों देशों के बीच की समानताएं हमारे मतभेदों को कम कर सकती हैं।'
- स्वरूप ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं के बीच एनएसजी में भारत की मेंबरशिप को लेकर भी बातचीत हुई। भारत जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर यूएन में बैन के लिए चीन के साथ बातचीत जारी रखेगा। उम्मीद है कि चीन हमारी दलीलों को समझेगा।
पहले चीन ने कहा था- भारत की NSG मेंबरशिप और अजहर को लेकर हमारा रुख नहीं बदलेगा
- ब्रिक्स समिट के पहले चीन ने कहा था कि भारत की न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में मेंबरशिप के लिए दावेदारी और मसूद अजहर को यूएन की तरफ से आतंकी करार देने के मु्द्दे पर उसका स्टैंड पहले की तरह रहेगा।
- चीन के विदेश विभाग के स्पोक्सपर्सन गेंग शुआंग ने कहा था, "भारत और चीन साथ मिलकर बेहतर काम करेंगे। लेकिन कुछ डिस्प्यूट भी हैं। हम ये भी कहना चाहते हैं कि भारत की एनएसजी मेंबरशिप और अजहर को लेकर बीजिंग की पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं होगा।"
- बता दें कि चीन ने यूएन में जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने और भारत की NSG मेंबरशिप का विरोध किया था।
- चीन का कहना है कि वह भारत के राजनीतिक फायदे के लिए ऐसी किसी भी कोशिश का सपोर्ट नहीं कर सकता।
सीसीईटी की वकालत कर सकता है भारत
- आतंकवाद से निपटने के लिए कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (सीसीआईटी) पर यूनाइटेड नेशन्स में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए भारत ब्रिक्स देशों के बीच एकता की पुरजोर वकालत कर सकता है।
- सीसीआईटी की पहल भारत की ओर से की गई थी, लेकिन यूएन के मेंबर्स के बीच आतंकवाद की परिभाषा को लेकर मतभेद के कारण यह फंसा पड़ा है। आतंकवाद से मुकाबले के लिए भारत ब्रिक्स देशों के बीच ज्यादा सहयोग पर जोर दे सकता है।
क्या है ब्रिक्स?
- BRICS (ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका) देशों का एक ग्रुप है। यह 2011 में बना था।
- इस ग्रुप को बनाने का मकसद अपने इकोनॉमिक और पॉलिटिकल दबदबे से वेस्टर्न कंट्रीज के रुतबे को चुनौती देना है।
- इन पांचों देशों की जीडीपी 1600 हजार करोड़ रुपए है।
- ब्रिक्स ने वॉशिंगटन में मौजूद इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड और वर्ल्ड बैंक के मुकाबले अपना खुद का बैंक बनाया है।
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