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रेलवे पूरा नहीं कर पाया रेवेन्यू टारगेट, अब किराया और माल भाड़ा बढ़ाने की तैयारी

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. रेवेन्यू टारगेट पूरा न कर पाने और इम्प्लॉइज के लिए सातवें पे कमीशन की सिफारिशों को लागू करने की मजबूरियों के चलते रेलवे पैसेंजर किराया और माल भाड़ा बढ़ा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में प्रपोजल तैयार है और उस पर सुरेश प्रभु को मुहर लगानी है। कितना बढ़ेगा किराया इस पर अभी फैसला नहीं...
- अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, रेलवे को अपने इम्प्लॉइज को सातवें पे कमीशन की सिफारिशों को लागू करते हुए सैलरी देनी है। इस वजह से उस पर 32 हजार करोड़ रुपए का सालाना बोझ बढ़ेगा।
- एक सूत्र के मुताबिक, "रेलवे का खजाना एक तरह से खाली है। किराया और माल भाड़ा बढ़ाने का प्रपोजल रेल मिनिस्टर के पास है। इसकी टाइमिंग को लेकर फैसला उन्हें ही करना है।"
- हालांकि, देश का यह सबसे बड़ा पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम रेवेन्यू बढ़ाने के लिए कौन-सा रास्ता चुनेगा, इस पर फैसला बाकी है।
- सीधे तौर पर किराया न बढ़ाकर रेलवे अपने सर्विस चार्ज भी बढ़ा सकता है।
- फैसला बजट से पहले भी किया जा सकता है, क्योंकि मार्च से रेलवे का पीक सीजन शुरू हो जाता है।
- सूत्रों के मुताबिक, रेलवे पैसेंजर किराए में 10 और माल भाड़े में 5 फीसदी बढ़ोत्तरी कर सकती है।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की पॉपुलेशन से ज्यादा पैसेंजर
- भारत में हर रोज करीब दो करोड़ तीस लाख लोग ट्रेन से सफर करते हैं। यह तादाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की पॉपुलेशन से भी ज्यादा है।
- रेलवे का नेटवर्क करीब 64 हजार किलोमीटर में फैला है।
- 2014 में सरकार बनाने के बाद एनडीए ने कुल मिलाकर करीब 14 पर्सेंट किराया बढ़ाया था।
- टिकट रिफंड और स्वच्छ भारत अभियान चार्ज लगाकर भी रेलवे ने कमाई बढ़ाने की कोशिश की थी।
- पिछले साल रेलवे को 17 जोन में माल भाड़े पर खर्च ज्यादा हुआ, जबकि आमदनी कम।
- 15 नवंबर तक रेलवे को माल भाड़े से 71 हजार 217 करोड़ रुपए मिले। यह टारगेट से 8.42 फीसदी कम है।
- किराए से 27 हजार 991 करोड़ रुपए मिले जो टारगेट से 11.6 पर्सेंट कम है।
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