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राम मंदिर विवाद सुलझाने के लिए पिछले 30 साल में 8 बार हुई कोशिशें

Dainik Bhaskar

Mar 22, 2017, 11:23 AM IST

1986 में पहली बार तब के कांची कामकोटि शंकराचार्य ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से बातचीत की लेकिन वो किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई।

राम मंदिर विवाद में तीन पक्ष हैं- निर्मोही अखाड़ा, विराजमान रामलला और सुन्नी वक्फ बोर्ड। (फाइल) राम मंदिर विवाद में तीन पक्ष हैं- निर्मोही अखाड़ा, विराजमान रामलला और सुन्नी वक्फ बोर्ड। (फाइल)
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नई दिल्ली. राम मंदिर विवाद को सुलझाने की बीते 30 साल में 8 कोशिशें हुईं लेकिन ये सभी नाकाम रहीं। 1986 में पहली बार तब के कांची कामकोटि शंकराचार्य ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से बातचीत की लेकिन वो किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। इसके बाद पीएम रहे चंद्रशेखर, पीवी नरसिम्हाराव, अटल बिहारी वाजपेयी की समय भी कोशिशें हुईं। बता दें कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर विवाद का हल आपसी बातचीत के जरिए हल करने को कहा था। जानें, किस-किसने क्या कदम उठाए...
1# 1986
- कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रेसिडेंट अली मियां नदवी के बीच बातचीत हुई। लेकिन वो किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।
2# 1990
- तब पीएम रहे चंद्रशेखर ने दोनों (हिंदू-मुस्लिम) समुदायों के बीच गतिरोध तोड़ने की कोशिश की। ये बातचीत उस वक्त टूट गई, जब वीएचपी वालंटियर्स पर मस्जिद के एक हिस्से को तोड़ने का आरोप लगा।
3# दिसंबर 1992
- बाबरी मस्जिद ढांचे को गिराए जाने (6 दिसंबर, 1992) के 10 दिन बाद पीएम रहे पीवी नरसिम्हाराव ने जस्टिस लिब्रहान की अगुवाई में एक जांच कमीशन का गठन किया। कमीशन ने 17 साल बाद 2009 में अपनी रिपोर्ट पेश की।
- इसे सही मायने में सुलह की कोशिश माना जा सकता है। हालांकि इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला।
4# जून 2002
- अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने ऑफिस में एक अयोध्या सेल बनवाई और उसमें पार्टी के सीनियर पदाधिकारी शत्रुघ्न सिंह को अप्वाइंट किया।
- सेल को इसलिए बनाया गया था ताकि वह हिंदू और मुस्लिम लीडर्स से बात कर सके। लेकिन ये कोशिश भी कामयाब नहीं हो पाई।
5# अप्रैल 2015
- ऑल इंडिया हिंदू महासभा के प्रेसिडेंट स्वामी चक्रपाणि और मुस्लिमों की ओर दायर पिटीशंस की अगुआई करने वाले मोहम्मद हाशिम अंसारी के बीच मुलाकात हुई। हालांकि इस मुलाकात के बाद कोई खास पहल नहीं हुई।
- अंसारी ने हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत ज्ञान दास से बातचीत की शुरुआत की। इसमें प्लान था कि विवादित 70 एकड़ की जमीन पर मंदिर और मस्जिद बनाई जाए। दोनों के बीच 100 फीट की दीवार रहेगी।
6# मई 2016
- ऑल इंडिया अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने अंसारी के साथ मुलाकात की। बातचीत आगे बढ़ती, इसके पहले ही अंसारी का निधन हो गया।
7# नवंबर 2016
- हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस पलक बसु ने कोर्ट के बाहर सेटलमेंट का सुझाव रखा। इसमें 10 हजार हिंदू और मुसलमानों के साइन किया हुआ प्रपोजल फैजाबाद कमिश्नर के सामने रखा गया।
- सेटलमेंट के लिए सारे डॉक्युमेंट सुप्रीम कोर्ट में रखे जा चुके हैं।
8# मार्च 2017
- सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मसले का हल आपसी बातचीत के जरिए करने को कहा। ये कहा कि कोर्ट मीडिएटर बनने को तैयार है।
किसका-क्या दावा?
- बीजेपी, वीएचपी समेत कई हिंदू संगठन विवादित जमीन पर राम मंदिर और सुन्नी वक्फ बोर्ड समेत कई मुस्लिम संगठन वहां मस्जिद होने का दावा करते हैं।
- हिंदुओं का कहना है कि वह जगह रामजन्म भूमि है, वहां भगवान राम का मंदिर था जिसे मुगल शासक बाबर के सिपहसालार मीर बाकी ने 1528 में तुड़वा दिया और उसकी जगह मस्जिद बनवा दी, जिसे बाबरी मस्जिद कहा गया।
कौन हैं 3 पक्ष?
- निर्मोही अखाड़ा: विवादित जमीन का एक-तिहाई हिस्सा यानी राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह।
- रामलला विराजमान: एक-तिहाई हिस्सा यानी रामलला की मूर्ति वाली जगह।
- सुन्नी वक्फ बोर्ड: विवादित जमीन का बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा।
क्या है राम मंदिर का मुद्दा?
- राम मंदिर मुद्दा 1989 के बाद अपने उफान पर था। इस मुद्दे की वजह से तब देश में सांप्रदायिक तनाव फैला था। देश की राजनीति इस मुद्दे से प्रभावित होती रही है।
- हिंदू संगठनों का दावा है कि अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली पर बाबरी मस्जिद बनी थी। मंदिर तोड़कर यह मस्जिद 16वीं शताब्दी में बनवाई गई थी।
- राम मंदिर आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिरा दिया गया था। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या दिया था फैसला?
- 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल, एस यू खान और डी.वी. शर्मा की बेंच ने मंदिर मुद्दे पर अपना फैसला भी सुनाते हुए अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था।
- बेंच ने तय किया था कि जिस जगह पर रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दे दिया जाए। राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़े को दे दी जाए। बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

for ram mandir babri masjid issue resolve eight attempts done in 30 years
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
 
1) सुब्रमण्यम स्वामी ने क्या कहा?
- पिटीशनर स्वामी ने कोर्ट से कहा कि छह साल से ज्यादा वक्त हो चुका है। इसलिए इस पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है। स्वामी ने यह भी कहा कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों से बातचीत की थी। उनका कहना था कि इस मसले के हल के लिए ज्यूडिशियरी के दखल की जरूरत है।
- अपनी पिटीशन में स्वामी ने दावा किया था कि इस्लामिक देशों में मौजूद प्रैक्टिस के मुताबिक, किसी भी मस्जिद को सड़क बनाने जैसे काम के लिए दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा सकता है। जबकि मंदिर अगर एक बार बन जाता है तो उसे दूसरी जगह नहीं ले जाया जा सकता।
- ये भी कहा कि  मस्जिद सरयू नदी के दूसरी तरफ बनना चाहिए। जबकि मंदिर वहीं बनना चाहिए, जहां अभी वो है। राम जन्मभूमि तो पूरी तरह राम मंदिर के लिए ही है। हम राम का जन्मस्थल तो नहीं बदल सकते।
- बीजेपी सांसद ने दलील दी कि सऊदी अरब और मुस्लिम देशों में मस्जिद का मतलब होता है, वो जगह यहां नमाज अदा की जाए और ये काम कहीं भी हो सकता है।
- स्वामी ने इस मामले में अर्जेंट हियरिंग की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यह संवेदनशील मुद्दा है और इस पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है।
 
2) सुप्रीम काेर्ट ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने कहा कि यह मुद्दा सेंसिटिव और सेंटिमेंटल है। बेहतर यही होगा कि इसका आपसी रजामंदी से हल निकले। इस विवाद का बातचीत के जरिए ऐसा हल निकालें, जिस पर सारे पिटीशनर्स और रिस्पॉन्डेंट्स राजी हों।
 
3) मीडिएटर्स पर बेंच ने क्या सुझाव दिया?
-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी पक्ष इस मसले को सुलझाने की नई कोशिशों के लिए मीडिएटर्स को चुन लें। अगर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी एक प्रिंसिपल मीडिएटर चुन सकता है।
- चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि अगर सभी संबंधित पक्ष ये चाहेंगे कि वे इस मुद्दे पर मीडिएट करें तो वे मध्यस्थ बनने को तैयार हैं। जरूरत पड़ने पर मेरे साथी जजों की भी मदद ली जा सकती है।
-बेंच ने स्वामी से कहा कि वे इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा करें और बातचीत शुरू करने को लेकर होने वाले फैसले के बारे में कोर्ट को 31 मार्च तक सूचित करें।
 
क्या है सरकार और RSS का स्टैंड?
- मोदी सरकार ने बार-बार यही कहा है कि राम मंदिर को संविधान के दायरे में रहकर ही बनाया जा सकता है।
- वहीं, यूपी असेंबली इलेक्शन में बीजेपी को मिली बड़ी जीत को आरएसएस नेता एमजी वैद्य ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मैन्डेट बताया था। चुनाव नतीजों के बाद वैद्य ने कहा था- बीजेपी के मैनिफेस्टो में भी अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे का जिक्र है। इसलिए ये माना जाना चाहिए कि राम मंदिर बनाने को लेकर जनता ने अपनी मंजूरी दे दी है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को हल नहीं कर पाता है तो एनडीए सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए कानून बनाना चाहिए।
 
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद किसका-क्या पक्ष...
6 दिसंबर, 1992 में अयोध्या में बाबरी ढांचे को गिरा दिया गया था। (फाइल) 6 दिसंबर, 1992 में अयोध्या में बाबरी ढांचे को गिरा दिया गया था। (फाइल)
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इस मुद्दे से जुड़े अलग-अलग पक्षों के बयान

1) सुप्रीम कोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि इस पर सभी संबंधित पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाएं। अगर इस मामले पर होने वाली बातचीत नाकाम रहती है तो हम दखल देंगे और इस मुद्दे का हल निकालने के लिए मीडिएटर अप्वाइंट करेंगे।

2) सरकार
- केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा, "राम मंदिर कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि वह लाखों-करोड़ाें लोगों की आस्था का मामला है। यह बेहतरीन सलाह है। समस्या के समाधान के लिए इससे बेहतर परामर्श नहीं हो सकता था।"
- केंद्रीय कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने कहा कि मामला दोनों पक्षों की सहमति से सुलझ जाए तो बेहतर है। इस पर सुप्रीम कोर्ट की ये पहल सराहनीय है।
- केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। उम्मीद है कि मसले का कोर्ट के बाहर हल निकल सकेगा।"
3) पिटीशनर सुब्रमण्यम स्वामी
- स्वामी ने ही इस मामले में जल्दी सुनवाई के लिए पिटीशन दायर की थी। उन्होंने कहा- हम हमेशा बातचीत को राजी थे। मंदिर और मस्जिद, दोनों बननी चाहिए। लेकिन मस्जिद सरयू नदी के पार बननी चाहिए। राम जन्मभूमि पूरी तरह तरह से राम मंदिर के लिए होनी चाहिए। हम भगवान राम का जन्मस्थान नहीं बदल सकते, लेकिन मस्जिद हम कहीं भी बना सकते हैं। 
- बता दें कि पिछले साल 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ही स्वामी को इजाजत दी थी कि वे अयोध्या टाइटल विवाद से जुड़े मामलों में दखल दें। स्वामी ने इस मामले में खुद एक अर्जी दाखिल कर मंदिर बनाने की मांग की है।

4) विपक्ष
- कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अगर दोनों पक्षों से जुड़े लोग आपसी रजामंदी वाला हल निकाल लेते हैं, तो इससे टिकाऊ अमन हासिल हो सकेगा और सभी पक्ष एक-दूसरे का सम्मान करेंगे। ऐसा नहीं होता है तो सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे की मेरिट के आधार पर फैसला करना चाहिए।
- सीपीएम के सीताराम येचुरी ने कहा, "मसला बातचीत से नहीं सुलझा, तभी कोर्ट गया था।"
- असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर रोज सुनवाई करनी चाहिए। इस तरह से एक दिन फैसला आ जाएगा।"

5# बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी
- बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि मामला आगे बढ़ गया है। समझौते से हल नहीं निकलेगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सीधे दखल दें, तो हो सकता है कि बात बन जाए।''
- जिलानी ने कहा, ''1986 में तब के कांची कामकोटि के शंकराचार्य और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रेसिडेंट अली मियां नादवी के बीच बातचीत शुरू हुई थी, लेकिन नाकाम रही। 1990 में प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने (यूपी के सीएम मुलायम सिंह यादव) और (राजस्थान के सीएम) भैरों सिंह शेखावत के साथ मिलकर कोशिशें शुरू की, लेकिन उस वक्त भी नतीजा नहीं निकला। बाद में पीएम नरसिंह राव ने एक कमेटी बनाई और कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय के जरिए कोशिशें आगे बढ़ीं, लेकिन 1992 में मस्जिद गिरा दी गई।''

6) हिंदू संगठन

a) विहिप
- विश्व हिंदू परिषद के चीफ प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि केंद्र सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए कानून बनाना चाहिए। विवादित भूमि भगवान राम की है और वहां भव्य राम मंदिर बनना चाहिए।
- विश्व हिंदू परिषद के त्रिलोकी पांडे ने कहा कि रामजन्म भूमि आस्था और श्रद्धा का मामला है। इसका समाधान तभी हो सकता है, जब दूसरे पक्ष भी यह मान लें कि विवादित स्थल ही रामजन्म भूमि है।
- उन्होंने कहा कि 1949 से सुलह समझौते के कई दौर चले, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज पलक बसु ने भी समझौते के प्रयास किए थे। इस मामले का हल कोर्ट से या संसद से कानून बनाकर निकाला जा सकता है। बहुसंख्यकों की इच्छा को सबसे ऊपर रखना ही होगा।

b) निर्मोही अखाड़ा
- निर्मोही अखाड़े के महंत रामदास ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला राम मंदिर विवाद को सुलझाने की नई कोशिश है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए।"

c) आरएसएस
- आरएसएस के दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, "हम हमेशा से आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट के पक्ष में थे। यह मामला धर्मसंसद में सुलझाया जाएगा। इसमें वे सभी पार्टियां शामिल होंगी, जो कोर्ट गई थीं।"

7) मुस्लिम संगठन
- मुस्लिम धर्मगुरु उमर इलियासी ने कहा, "ये मामला पुजारियों और मौलवियों के बीच का है। दोनों के बीच आपसी सहमति से ही हल होना चाहिए।"
- मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने जो बात कही है, उसके बारे में मुस्लिम विद्वानों से बात करेंगे।"
- बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाजी महबूब ने कहा- हम भी इस बात के पक्षधर थे कि दोनों पक्ष इस मामले में बैठ कर बातचीत करें।
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राम मंदिर विवाद में तीन पक्ष हैं- निर्मोही अखाड़ा, विराजमान रामलला और सुन्नी वक्फ बोर्ड। (फाइल)राम मंदिर विवाद में तीन पक्ष हैं- निर्मोही अखाड़ा, विराजमान रामलला और सुन्नी वक्फ बोर्ड। (फाइल)
for ram mandir babri masjid issue resolve eight attempts done in 30 years
6 दिसंबर, 1992 में अयोध्या में बाबरी ढांचे को गिरा दिया गया था। (फाइल)6 दिसंबर, 1992 में अयोध्या में बाबरी ढांचे को गिरा दिया गया था। (फाइल)
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