5 हजार से ज्यादा के सभी सरकारी पेमेंट डिजिटल होंगे: गवर्नमेंट पोर्टल से मिलेंगे काॅन्ट्रेक्ट, टेंडर सिस्टम खत्म किए जाएंगे

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. अब पांच हजार रुपए से ज्यादा के सभी सरकारी पेमेंट डिजिटल (ई-पेमेंट) तरीके से ही किए जा सकेंगे। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने सोमवार को इस बारे में सभी मंत्रालयों को ऑर्डर जारी कर ये भी कहा कि ये तरीका जल्द से जल्द अमल में लाया जाए। मिनिस्ट्री ने एक बयान जारी कर ये जानकारी दी। दूसरी ओर, सरकारी ठेके अब फ्लिपकार्ट और अमेजन की तरह ऑनलाइन पोर्टल के जरिए दिए जाने की तैयारी भी सरकार ने कर ली है। यानी इनके लिए अब टेंडर प्रोसेस नहीं अपनाई जाएगी। हालांकि, शुरुआती तौर पर ये पोर्टल अगस्त में ही लॉन्च कर दिया गया था। सरकारी कामों में करप्शन रोकने के लिए बड़े फैसले....

- पांच हजार रुपए से ज्यादा के सरकारी भुगतान अब ई-पेमेंट के जरिए होंगे। डिपार्टमेंट्स से कहा गया है कि इस ऑर्डर को फौरन लागू किया जाए।
- तमाम तरह के सप्लायर्स, कॉन्ट्रेक्टर्स और लोन देने या लेने वालों के लिए ई-पेमेंट ही अपनाया जाएगा। फैसला कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।
सरकारी कामों के लिए ऑनलाइन पोर्टल
- मोदी सरकार फ्लिपकार्ट और अमेजन ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल की तरह पोर्टल इस्तेमाल करने जा रही है। इस पोर्टल से सभी तरह की सरकारी खरीद और ठेक दिए जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके लिए अफसरों को ट्रेनिंग फरीदाबाद के नेशनल इन्सटीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट में दी जा रही है।
- सभी अफसरों को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) नाम के पोर्टल की ट्रेनिंग दी जा रही है।
क्या होगा GeM से?
- राज्य और केंद्र सरकारें अभी तक छोटे या बड़े कामों को कराने के लिए टेंडर प्रोसेस अपनाती रही हैं। इसकी वजह से मनमाने रेट्स लगाए जाते हैं और मिलीभगत के जरिए कमीशन का खेल भी होता है। कुल मिलाकर टेंडर प्रोसेस और कैश पेमेंट से करप्शन को बढ़ावा मिलता रहा है।
- मोदी सरकार इसी करप्शन प्रोसेस को रोकने के लिए GeM ला रही है। इससे कैशलेस सोसायटी बनाने में भी मदद मिलेगी जो पीएम मोदी चाहते हैं।
- फिलहाल, इस पोर्टल पर 56 कैटेगरी के 3100 प्रोडक्ट मौजूद हैं। ये पोर्टल 38 करोड़ रुपए का बिजनेस भी कर चुका है।
- 1129 गवर्नमेंट बायर्स इस पर रजिस्टर्ड है। इसमें से 469 तो सरकारी विभागों के हेड हैं।
- इसका फायदा भी हुआ है। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने हाल ही में इसी पोर्टल से एक फोटोकॉपी मशीन 97,000 रुपए में खरीदी। जबकि इसका रेट कॉन्ट्रेक्ट यानी टेंडर 1 लाख 52 हजार 250 रुपए था। यानी करीब 57 फीसदी पैसा बचाया गया।
- सरकार का मानना है कि इस पोर्टल के इस्तेमाल से काफी सेविंग की जा सकेगी।
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