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नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जानिए लीडरशिप के अचूक फंडे

अपने आक्रामक तेवरों के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार अपने विरोधी दलों के निशाने पर रहे हैं|

Danik Bhaskar | Sep 15, 2017, 04:34 PM IST
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अपने आक्रामक तेवरों के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही कई बार अपने विरोधी दलों के निशाने पर रहे हों, लेकिन उनमें कई ऐसी बातें हैं, कई ऐसे गुण हैं जिन्हें किसी ने भी अपनी जिंदगी में उतार लिया तो समझो सफलता उसके कदम चूमेगी। अपना 67वां जन्मदिन मना रहे नरेंद्र मोदी के उन्हीं गुणों के बारे में हम आपको बताएंगे जो आपको एक सफल लीडर बना सकते हैं।

आराम ? वो क्या होता है ?

सबसे पहला गुण जो कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीख सकता है वो है काम के प्रति निष्ठा यानि पहले काम फिर आराम। जो लोग काम को आराम से ज्यादा तरजीह देते हैं
सफलता उससे मुंह मोड़कर कहीं जा ही नहीं सकती। एक बिजनेसमैन के लिए तो ये बहुत जरूरी है। उसके लिए आराम हराम है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लिए कोई छुट्टी तय
नहीं कर रखी। प्रधानमंत्री बने उन्हें तीन से ज्यादा हो गए, लेकिन कभी भी उन्होंने वीकेंड के बहाने आराम के बारे में नहीं सोचा।

समय पर जीत

मोदी की दूसरी चीज जिसे अपनाकर आप सफल हो सकते हैं वो है टाइम मैनेजमेंट। इसकी जरूरत कुछ यूं समझी जा सकती है कि मान लीजिए आपको तीन-चार काम एक ही दिन में निपटाने हैं। अगर आपने सही से टाइम मैनेज किया हुआ है तो आपके सभी काम चुटकियों में हो जाएंगे, लेकिन टाइम में लापरवाही आपके काम को बिगाड़ सकती है और उस पर जो टेंशन मिलेगी सो अलग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफलता की कुंजी यही है। वरना सभी जानते हैं कि एक प्रधानमंत्री के पास कितना काम होता है, कितनी उसे यात्राएं करनी पड़ती है, हर तरफ से उस पर दबाव होता है, पार्टी का दबाव, देश की सुरक्षा का दबाव, बढ़ते आतंकवाद, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की चिंता और ना जाने क्या क्या..बावजूद इसके मोदी सबकुछ अच्छे से मैनेज कर लेते हैं और उनके चेहरे पर शिकन तक नहीं दिखती। वरना आपको क्या लगता है कि दिन में उन्हें क्या एक्स्ट्रा घंटे दिए जाते हैं ?

काम को टीम के बीच बांटना, सभी को समान समझना

उस व्यक्ति से सफलता कभी मुंह मोड़ ही नहीं सकती जो अपना काम अपनी टीम के बीच बांटकर और सभी को साथ लेकर चलता है और एक बिजनेसमैन के लिए भी ये बहुत जरूरी है। आप अपने काम को अपनी टीम के बीच बांट दें, लेकिन उसे सपोर्ट करें और जब जरूरत हो अपना सहयोग दें। आपकी टीम को भी लगना चाहिए कि आपके लिए वो कितने जरूरी हैं और उनके बिना आप कुछ भी नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही ले लीजिए। एक प्रधान सेवक होने के नाते उनके पास ढेरों काम हैं और खूब जिम्मेदारियां हैं, लेकिन एक पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने खुद को सामने रखा है। जब भी राज्यों के विधान सभा चुनाव होते हैं तो उसकी कमान मोदी अपने सहयोगियों को सौंप देते हैं। हालांकि बीच-बीच में वो टाइम निकालकर वहां प्रचार के लिए जाते हैं।

ब्रांडिंग के बिना कुछ नहीं

आप कोई भी काम कर रहे हैं या फिर अपना बिजनेस लॉन्च कर रहे हैं, इसके लिए जरूरी है लोगों के साथ कनेक्शन और उसका प्रमोशन यानि पब्लिक रिलेशन और ब्रांडिंग। किसी भी चीज के लिए पॉजिटिव आउटलुक पैदा करने के लिए जरूरी है कि उसे लोगों के बीच पहुंचाया जाए और तभी हो सकता है जब उसकी सही तरीके से ब्रांडिंग की जाए। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही ले लीजिए। आपने खुद भी देखा है कि कैसे वो टाइम निकालकर अपनी अनाउंस की गई योजनाओं के प्रमोशन और शिलान्यास के लिए पहुंचते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं उसे सफल बनाने के लिए जी-जान से जुट जाते हैं।

विश्वसनीयता पर टिकी सफलता

आप कोई भी काम करते हैं या फिर कोई प्रोडक्ट या बिजनेस लॉन्च करते हैं तो ये बात जरूर गांठ बांध लें कि इसके लिए विश्वसनीयता बहुत जरूरी है और ये तभी पॉसिबल है जब आप लोगों से संपर्क साधेंगे, उनके बीच जाएंगे अपने काम और प्रोडक्ट के बारे में बताएंगे...लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि जो भी वादे आपने लोगों से किए हैं उन्हें आप पूरा करें। विश्वास बनाए रखने का क्या नतीजा होता है ये खुद आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केस में भी देख
चुके हैं। जनता ने उनमें विश्वास दिखाया तो जीत पक्की हो गई।

सफलता का पैमाना फीडबैक

अब आपने काम तो कर लिया यानि बिजनेस भी खोल लिया लेकिन उससे लोग संतुष्ट हैं या नहीं। उसे अच्छा फीडबैक मिल रहा है या नहीं, ये जानना बहुत जरूरी है क्योंकि इसी फीडबैक पर आपके बिजनेस या काम की सफलता टिकी है। नरेंद्र मोदी भी अपनी हर योजना या स्कीम के लिए जनता का फीडबैक जरूर मांगते हैं।
इसके अलावा और भी बहुत कुछ है जो उनसे सीखा जा सकता है। जैसे कि मोदी ने हमेशा ही साबित किया है कि लीडर बनने के लिए किसी खास परिवार में जन्म लेना जरूरी नहीं, और न ही आपका राजनीतिक बैकग्राउंड होना ही जरूरी है, बल्कि समर्पण और कड़ी मेहनत आपको सफल बना सकती है।

मोदी से ये सीखा जा सकता है

  • काम और नतीजे पर फोकस।
  • हमेशा खुद को पहले से और बेहतर बनाने की कोशिश करते रहता।
  • लोगों को जिम्मेदार बनाना और उन्हें निर्णय लेने के अधिकार देना।
  • हार अपरिहार्य है। उससे कैसे निपटें और क्या सीख लें, ये ज्यादा जरूरी है।
  • नकारात्मक छवि से परेशान न होना, सिर्फ लक्ष्य पर नज़र।
  • हमेशा कुछ नया सीखने की चाह।
  • मुश्किल वक्त में भी संयमित रहना। भाषा और मनोदशा पर नियंत्रण।
  • प्लान बनाएं, भले ही आप उसके बारे में कम जानते हों, उस पर तुरंत काम शुरू कर दें।
  • सेहत पर ध्यान दें। अगर आप महत्वाकांक्षी हैं तो अच्छी सेहत ही लक्ष्य पाने में मदद करेगी।

आलोचनाओं से घबराएं नहीं


मोदी की कामयाबी के सफर में आलोचनाओं को झेलने का उनका गुण काफी मददगार रहा
है। विपक्षियों के अलावा खुद भाजपा के भीतर भी कई बार उनकी आलोचना हुई, मगर इससे
घबराए बिना वह अपना काम करते रहे। सीख- आलोचनाओं पर ध्यान न देकर सिर्फ अपने लक्ष्य और उसके नतीजे पर ध्यान दें।

न उम्र की सीमा हो...


67 साल की उम्र में भी मोदी बिना थके, बिना रुके काम करते हैं और साबित करते हैं कि
जज्‍बे के सामने उम्र बाधक नहीं बन सकती। सीख- उम्र को कारण न बनाएं, बल्कि जो करना चाहते हैं उसमें जुट जाएं।

बीता नहीं, आगे देखें


मोदी ने दिखाया है कि पीछे छूट गई बातों पर अफसोस करने से कुछ हासिल नहीं होता और
जिंदगी का मकसद हमेशा आगे बढ़ना होना चाहिए।

सीख- हमेशा आने वाले समय को देखें, न कि बीते हुए समय में मिली असफलता को। इससे
आपका वर्तमान भी प्रभावित होगा।

निर्णय लेने की क्षमता का विकास


अगर आप खुद को नेता कहते हैं तो आपमें निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए। अगर
आपमें निर्णय लेने की काबिलियत है तो आपको नेता बनने का मौका मिलेगा। ये दोनों एक
ही सिक्के के दो पहलू हैं। सीख- किसी खास लक्ष्य को हासिल करने के लिए पहले अपने अंदर जरूरी योग्यताएं लाएं। योग्यता के बिना लक्ष्य प्राप्ति संभव नहीं।

काबिल टीम


बेहतर और समय पर रिजल्ट हासिल करने के लिए तेज और विश्वसनीय लोगों की टोली
बनानी चाहिए।


सीख- टीम बनाएं तो उसमें काबिलियत के साथ-साथ ये भी देखना जरुरी है कि वे आपके
विश्वसनीय हों और तेज़ काम करने के आदी भी। तभी समय पर रिजल्ट मिल सकेगा।