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नरेंद्र मोदी की प्रेरणादायी लाइफ, बचपन से अब तक

रोज की तरह वो पिता की मदद करने रेलवे स्टेशन पहुंच चाता और चाय बेचता, किसने सोचा था कि ये लड़का एक दिन देश पर राज करेगा।

Danik Bhaskar | Sep 15, 2017, 05:54 PM IST
स्कूल से लौटने के बाद वो रोजाना रेलवे स्टेशन पर अपने पिता के पास पहुंच जाता, जहां वो चाय बेचते थे। पिता को मेहनत करते देख वो भी चाय के काम में जुट जाता और भाग-भागकर स्टेशन पर लोगों को चाय बेचता। उस वक्त किसी ने क्या, खुद उस लड़के के पिता ने नहीं सोचा होगा कि मेरा बेटा कभी देश और दुनिया पर राज करेगा।
ये लड़का था नरेंद्र दामोदरदास मोदी, जो आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। नरेंद्र मोदी का जन्म गुजरात के छोटे से गांव वाडनगर में हुआ था। घर की आर्थिक स्थिति खराब थी इसलिए बेटे दामोदरदास को पढ़ाने और घर का खर्च चलाने के लिए दोनों मां-बाप को काम करना पड़ता। बाप रेलवे स्टेशव पर चाय बेचता तो मां घर-घर जाकर बर्तन साफ करती। मां-बाप को यूं काम करते देख दामोदारदास को बहुत बुरा लगता और शायद यही वजह थी कि उनका पढ़ाई में भी ज्यादा मन नहीं लगता था।
स्कूल की छुट्टी हुई नहीं कि तुरंत बस्ता उठाकर पहुंच जाते स्टेशन...पिता की मदद करने। दामोदारदास यानि नरेंद्र मोदी का झुकाव एक्टिंग की तरफ था और इसी के चलते वो हर नाटक में बढ़-चढ़कर भाग लेते, लेकिन जैसे-जैसे वो बड़े हुए उनकी दिलचस्पी संघ में हो गई।
ये होना भी लाजमी था क्योंकि उस वक्त गुजरात में आरएसएस का काफी मजबूत आधार था। खैर, 17 साल की उम्र में ही नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जॉइन कर लिया और यहीं से उनके राजनीतिक करियर की नींव रख गई।
कई सालों तक उन्होंने आरएसएस के प्रचारक के तौर पर काम किया। साल 2001 नरेंद्र मोदी के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। यही वो साल था जब उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई। करीब 13 सालों तक उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया और गुजरात को एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया।
हालांकि इस दौरान नरेंद्र मोदी की राह में कई मुश्किलें आईं, कई इल्जाम उन पर लगे। गुजरात के मुख्यमंत्री बने हुए नरेंद्र मोदी को सिर्फ चंद ही महीने हुए थे कि तभी गोधरा कांड हो गया जिसमें काफी लोग मारे गए। ये मामला सुलझा भी नहीं था कि इसके ठीक कुछ वक्त बाद ही गुजरात में दंगे भड़क गए और मोदी को यह कहकर कसूरवार ठहराया गया कि वो दंगो को रोकने में नाकामयाब रहे।
इस दौरान उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की भी मांग उठी, लेकिन कई दिग्गजों की वजह से नरेंद्र मोदी इस मुश्किल को पार करने में कामयाब रहे और गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहे।
आरएसएस में रहते हुए नरेंद्र मोदी ने अपनी इतनी मजबूत छवि बना ली थी कि किसी भी तरह का काम उन्हें ही सौंपा जाता। संघ के होने वाले कार्यक्रमों में वो जो मैनेजमेंट दिखाते उससे सभी प्रभावित थे। ये शायद इसी का परिणाम था कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में देखा जाने लगा।
साल 2013 में नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान का प्रमुख बनाया गया, साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री पद का बीजेपी उम्मीदवार भी घोषित कर दिया गया। नतीजा ये हुआ कि 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी भारी बहुमत से जीती और केंद्र में बीजेपी सरकार
आ गई। उस वक्त लोगों ने कहा भी कि उन्होंने सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी के चलते बीजेपी को वोट दिया वरना वो किसी और पार्टी को वोट दे देते।
नरेंद्र मोदी में लोगों ने जो विश्वास दिखाया उस पर मोदी अभी तक खरे उतरे हैं। अपने तीन साल से भी ज्यादा के कार्यकाल में मोदी ने कई योजनाओं को शुरू करवाया जिन्हें लोगों ने हाथोंहाथ लिया। हालांकि नोटबंदी और डिजिटाइजेशन जैसे कुछ ऐसे मुद्दे भी रहे जो चैलेंजिंग थे लेकिन लोगों ने उनका भी स्वागत किया।