GST पर सबकी सहमति चाहती है सरकार: जेटली; कांग्रेस ने कहा- इस रूप में मंजूर नहीं

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. अरुण जेटली ने कहा है कि GST टैक्स रिफॉर्म्स की दिशा में एक अहम कदम है और सरकार इसे सब की सहमति से पास कराना चाहती है। वहीं, कांग्रेस इस मामले पर रुख बदलती नजर आ रही है। उसने मंगलवार को कहा कि उसे जीएसटी उस रूप में मंजूर नहीं है जिस फॉर्मेट में सरकार ने इसे तैयार किया है। बीजेपी सांसदों से मिले जेटली...
 
- बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड की मीटिंग के बाद पार्टी सांसदों को ब्रीफ करते हुए फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि टैक्स रिफॉर्म्स के लिहाज से GST एक ऐतिहासिक कदम है। सरकार चाहती है कि इसे सबकी सहमित से पास कराया जाए। 
- इस मीटिंग में नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। मीटिंग के बाद पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर अनंत कुमार ने मीडिया को जानकारी दी। 
- कुमार ने कहा- फाइनेंस मिनिस्टर ने सांसदों के जीएसटी से जुड़े चार बिलों के बारे में पूरी जानकारी दी। सांसदों को ये भी बताया गया कि इसमें सबकी संप्रभुता का ध्यान रखा गया है। 
- जेटली ने पार्टी सांसदों को सेंट्रल जीसएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी, यूनियन टेरेटरी जीएसटी और कम्पनसेशन लॉ के बारे में बताया। जेटली ने कहा कि एक देश एक टैक्स के लिहाज से भी जीएसटी बेहद अहम बिल है।  
 
कांग्रेस ने किया विरोध
- मंगलवार को राहुल गांधी ने पार्टी सांसदों की मीटिंग ली। इसके बाद कांग्रेस का बयान आया कि मौजूदा रूप में जीएसटी का पार्टी समर्थन नहीं करती। 
- पार्टी की तरफ से कहा गया है वो इस मुद्दे पर जनता की चिंताएं उठाएगी और बिल में जरूरी बदलावों की मांग भी करेगी। 
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, राहुल गांधी ने पार्टी सांसदों से कहा दि वो सदन मे कंस्ट्रक्टिव अपोजिशन का रोल प्ले करें। सदन में जीएसटी में बदलाव की मांग तो करें लेकिन ये नजर नहीं आना चाहिए कि पार्टी इसके खिलाफ है। 
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, राहुल ने सांसदों से कहा कि वो सदन में किसानों से जुड़े मुद्दे और कर्ज के मामले उठाते रहें। इस दौरान लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकर्जुन खड़गे भी मौजूद थे। 
 
संसद में पेश हुए थे 4 बिल
-  जेटली ने गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) से जुड़े 4 बिलों को सोमवार को संसद में पेश किया था। सेंट्रल जीएसटी (सी-जीएसटी), इंटिग्रेटेड जीएसटी (आई-जीएसटी), यूनियन जीएसटी (यूटी-जीएसटी) और मुआवजा कानून बिल। इन पर 29 मार्च को चर्चा होगी। 
- कहा जा रहा है कि अगर संसद ने समय पर इन बिलों को मंजूरी नहीं दी तो जुलाई में जीएसटी लागू करना मुश्किल होगा। स्टडी के मुताबिक, जीएसटी से देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 2% तक बढ़ सकती है। संसद का सेशन 12 अप्रैल तक चलना है। 
 
एक जुलाई से जीएसटी लागू करना चाहती है सरकार
- सरकार इस इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम को 1 जुलाई से लागू करने का टारगेट लेकर चल रही है। 
- इससे इंडियन प्रोडक्ट न सिर्फ घरेलू बाजार में, बल्कि इंटरनेशनल मार्केट में भी कॉम्पिटीटर हो जाएंगे। 
- स्टडी के मुताबिक, इससे देश की जीडीपी ग्रोथ रेट एक से दो फीसदी तक बढ़ सकती है। इसके न केवल नई नौकरियां पैदा होंगी, बल्कि प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी। 
- अरुण जेटली की अगुआई वाली जीएसटी काउंसिल पिछली दो बैठकों में स्टेट जीएसटी के साथ चारों विधेयकों के मसौदों को मंजूरी दे चुकी है। 
- एसजीएसटी को सभी राज्यों विधानसभा में पारित किया जाना है, जबकि अन्य चार कानूनों के बिल के लिए संसद से मंजूरी ली जानी है।  
- जीएसटी के लिए 5, 12, 18 और 28% की चार दरों की स्लैब का प्रपोजल है।
 
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