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सियाचिन: यहां दुश्मन से ज्यादा कुदरत के कहर से जंग लड़ते हैं हमारे सैनिक

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली/श्रीनगर. सियाचिन ग्लेशियर तीन तरफ से पाकिस्तान और चीन से घिरा है। यहां दिन में टेम्प्रेचर माइनस 30 से -55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। खराब मौसम में भी भारतीय सैनिक चौबीसों घंटे सीमा की निगरानी करते हैं। 1984 से पहले यहां आर्मी की तैनाती नहीं थी। लेकिन सियाचिन पर पाकिस्तान के दावे के बाद इंडियन आर्मी ने 'ऑपरेशन मेधदूत' चलाकर दुनिया के सबसे ऊंचे और ठंडे बैटल फील्ड में अपनी पकड़ मजबूत की। सियाचिन में भारत की 150 पोस्ट और 10 हजार सैनिक...
- सियाचिन पोलर रीजन के अलावा धरती पर मौजूद सबसे बड़ा ग्लेशियर है।
- यहां चीन-पाक से सटी 75 KM बॉर्डर की निगरानी करना आर्मी के लिए सबसे कठिन है।
- सियाचिन में भारतीय फौज की 150 पोस्ट हैं, जिसके लिए 10 हजार सैनिक तैनात किए गए हैं।
- सोल्जर यहां विशेष तरह के इग्लू कपड़ों में रहते है। सैनिक महीने में सिर्फ एक बार नहाते हैं।
- सैनिकों को यहां हाइपोक्सिया और हाई एल्टीट्यूड जैसी बीमारियां हो जाती है।
- वजन घटने लगता है। भूख नहीं लगती, नींद नहीं आने की बीमारी। मेमोरी लॉस का भी खतरा।
- यहां तैनाती पर ऑफिसर्स को हर माह 21 हजार, सोल्जर्स को हर माह 14 हजार अलांउस मिलता है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, सियाचिन से जुड़े कुछ खास FACTS...
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