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मोदी हैं साइलेंट PM, उन्हें सोनिया-राहुल से संपर्क बढ़ाने की दी थी सलाह : मनमोहन

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. मनमोहन सिंह के मुताबिक, उन्होंने नरेंद्र मोदी को सलाह दी थी कि वे नेशनल इर्म्पोटेंस के मुद्दों पर कांग्रेस को साथ लेने के लिए राहुल और सोनिया गांधी से अच्छा कॉन्टैक्ट रखें। पूर्व प्रधानमंत्री ने ये भी कहा है कि मोदी साइलेंट प्राइम मिनिस्टर हैं। अहम मुद्दों पर वे चुप्पी साध लेते हैं। मनमोहन ने कहा- कांग्रेस को हल्के में मत लीजिए....
- ‘इंडिया टुडे’ को दिए गए एक इंटरव्यू में मनमोहन सिंह के कई अहम बातें कहीं हैं। करीब दो साल पहले सत्ता से हटने के बाद मनमोहन ने यह पहला इंटरव्यू दिया है।
- सिंह के मुताबिक, मोदी को सोनिया-राहुल से कॉन्टैक्ट बढ़ाने की सलाह उन्होंने मोदी को पिछले साल पार्लियामेंट सेशन शुरू होने के पहले दी थी।
- सिंह ने कहा, “मोदी ने मेरी बातों को बड़े ध्यान से सुना लेकिन बोले कुछ भी नहीं।”
- “सोनिया और राहुल कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं। मैं आपकी मदद नहीं कर सकता। आपकी सरकार को इन दोनों नेताओं से बेहतर रिश्ते रखने होंगे। कांग्रेस को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर नेशनल हेरॉल्ड जैसे केस होंगे और फिर आप उम्मीद करेंगे तो...?”
- मनमोहन शायद ये कहना चाहते थे कि इस तरह के हालात में कांग्रेस मोदी की मदद नहीं करेगी।
- सिंह के मुताबिक, मोदी सरकार ने जीएसटी समेत अहम मुद्दों पर कांग्रेस से बातचीत नहीं की।
- फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली अपनी बेटी की शादी के लिए न्योता देने जब सोनिया और उनके पास आए तब इस बारे में बात हो पाई।
- सिंह के मुताबिक, “ये वो तरीका नहीं है जिससे आप देश की सबसे बड़ी अपोजिशन पार्टी से रिश्ते रखते हैं।”
- सिंह ने कहा- “ऐसा लगता है जैसे रूलिंग पार्टी को देश चलाने के लिए कांग्रेस की जरूरत ही नहीं है।”
इन्टॉलरेंस पर चुप्पी क्यों?
- मनमोहन ने इन्टॉलरेंस, बीफ बैन और कम्यूनल वॉयलेंस जैसे मुद्दों पर मोदी की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाए।
- उन्होंने कहा- “हमारे देश की जनता चाहती है कि पीएम अहम मुद्दों पर देश को रास्ता दिखाएं। लेकिन मोदी बीफ प्रॉब्लम और मुजफ्फरनगर जैसे मामलों पर चुप रहे। ”
- सिंह के मुताबिक, “मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। उन्हें लोगों को यह भरोसा दिलाना होगा कि वह सबकी खुशी के बारे में सोचते हैं।”
- मनमोहन ने ये भी कहा कि मोदी सरकार इकोनॉमिक डेवलपमेंट के मौकों का सही फायदा नहीं उठा पाई। वो भी तब जबकि इसके लिए पहले से जमीन तैयार थी। और यूपीए के मुकाबले माहौल भी अच्छा था।
- पाकिस्तान से रिश्तों को लेकर भी मनमोहन मोदी सरकार से खफा दिखे। उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया एक जैसा नहीं है। मोदी के लाहौर दौरे को भी मोदी ज्यादा तवज्जो नहीं देते। उन्होंने कहा, “पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते रखना जरूरी तो है लेकिन इसके लिए उम्मीद से ज्यादा नहीं सोचा जाना चाहिए।”
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