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बजट सेशन से पहले एनडीए अलायंस की वॉर्निंग- वैसा ही बर्ताव करो जैसा वाजपेयी ने किया

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सेशन के पहले एनडीए में शामिल पार्टियों ने सरकार को खुले शब्दों में वॉर्निंग दे डाली है। अकाली दल का कहना है कि सरकार हमें कमजोर न समझे। बीजेपी आलाकमान को वैसा ही बर्ताव करना चाहिए, जैसा हमारे साथ अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। एक राय बनाने के लिए बुलाई गई थी मीटिंग, भड़क गए सहयोगी दल...
- सोमवार को बीजेपी ने बजट सेशन से पहले एक राय बनाने के लिए वेंकैया नायडू के घर सहयोगी दलों के साथ एक मीटिंग बुलाई थी।
- मीटिंग में अमित शाह के अलावा, सुखबीर सिंह बादल और टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद थे।
- मीडिया रिपोर्ट की मानें तो बादल ने कड़े शब्दों में कहा, "एनडीए में शामिल पार्टियों को टेकन फॉर ग्रान्टेड माना जा रहा है। बीजेपी को चाहिए कि वह सहयोगी दलों की बात उसी तरह सुने, जिस तरह वाजपेयी सुना करते थे।"
- बादल के मुताबिक, "बीजेपी को अलायंस जारी रखने पर अपना स्टैंड क्लियर करना चाहिए।"
- बादल ने पंजाब के बीजेपी नेताओं पर आरोप लगाया कि आलाकमान को अपने नेताओं को काबू में भी रखना चाहिए। बीते महीनों में पंजाब के बीजेपी नेताओं ने अकाली दल से अलायंस तोड़ने की कोशिश की थी।
- "बीजेपी के साथ न तो मुस्लिम हैं और न ही क्रिश्चियन। ऐसे में, जब सिख उन्हें सपोर्ट कर रहे हैं तो पार्टी उन्हें अलग करने की कोशिश क्यों कर रही है?"
- बादल की यह भी शिकायत थी कि पंजाब में अरुण जेटली के प्रोग्राम के बारे में बताया ही नहीं जाता।
- "आप मुझे एक उदाहरण दें जहां किसी अकाली नेता ने बीजेपी नेता के खिलाफ बोला हो। लेकिन मैं आपको कई उदाहरण दे सकता हूं, जिसमें बीजेपी नेताओं ने अकालियों पर निशाना साधा।"
- बता दें कि पंजाब में अगले साल विधानसभा इलेक्शन है।
टीडीपी-शिवसेना का क्या रुख रहा?

- शिवसेना के महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार के साथ अच्छे रिलेशन नहीं चल रहे हैं।
- सूत्रों के मुताबिक, संजय राउत ने कहा, "पिछले 20 महीने में बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों को कमतर ही दिखाया है। कभी तो यह समझना मुश्किल होता है कि ये हमारी सरकार है या नहीं।"
- टीडीपी चीफ एन. चंद्रबाबू नायडू ने सहयोगी दलों से रिलेशन मजबूत करने के लिए मीटिंग का सुझाव दिया था। इसे लेकर वे अमित शाह और नरेंद्र मोदी से मिले थे।
- आरपीआई के रामदास आठवले ने कहा, "हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित स्टूडेंट रोहित वेमुला सुसाइड केस ने भी सरकार की इमेज खराब की है।"
- बता दें कि कुछ दिन पहले रामविलास पासवान ने भी बीजेपी के रुख को लेकर दुख जताया था। (पूरी खबर के लिए पढ़ें, पासवान का दर्द- BJP के इशारे पर नाचना पड़ रहा है)
क्यों बुलानी पड़ी मीटिंग?

- अलायंस में शामिल पार्टियों के साथ को-ऑर्डिनेशन और कम्युनिकेशन में कमी की लगातार शिकायतें मिलने के बाद बीजेपी ने मीटिंग बुलाने का फैसला किया।
- मीटिंग का मकसद था कि एनडीए के सभी सांसद एक पॉलिसी और एक डिसीजन को मानें।
- सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी को यह भी लग रहा था कि बजट सेशन में अपोजिशन एक बार फिर हमलावर हो सकता है। ऐसे में, सहयोगी दलों की नाखुशी परेशानी बढ़ा सकती है।
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