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INS अरिहंत नेवी के बेड़े में शामिल, न्यूक्लियर सबमरीन रखने वाला 6th देश बना भारत

अब तक 5 देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के पास ही न्यूक्लियर ऑर्म्ड सबमरीन थीं।

Dainik Bhaskar

Oct 18, 2016, 08:43 AM IST
India becomes the 6th country amd joins the elite nuclear triad club
नई दिल्ली. भारत ने देश में बनी पहली न्यूक्लियर आर्म्ड सबमरीन आईएनएस अरिहंत को बेहद खामोशी से नेवी के बेड़े में शामिल कर लिया है। एक टीवी चैनल की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसके मुताबिक, सबमरीन को इसी साल अगस्त में बेड़े में शामिल किया गया। INS अरिहंत मिलने से भारत दुनिया का ऐसा छठा देश बन गया है, जिसने खुद न्यूक्लियर आर्म्ड सबमरीन बनाई है। अब तक 5 देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के पास ही न्यूक्लियर ऑर्म्ड सबमरीन थीं। मोदी ने सौंपा नेवी को...
- पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ऐसा माना जा रहा है कि अरिहंत नेवी में शामिल हो गई है, हालांकि वाइस एडमिरल जीएस पब्बी ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने इतना जरूर कहा कि इस बारे में एक फॉर्मल अनाउंसमेंट जल्द ही किया जा सकता है।
- यूएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, नेवी ऑफिशियल्स ने टीवी चैनल न्यूज एक्स की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया है, न ही उन्होंने इसे कन्फर्म किया है।
- टीवी चैनल न्यूज एक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी साल अगस्त में नरेंद्र मोदी ने INS अरिहंत को खामोशी के साथ इंडियन नेवी को सौंप दिया। इसके बाद इसने पूरी तरह से काम करना शुरू कर दिया है।
- इंडियन नेवी अब उन सुपरपावर्स के क्लब में शामिल हो गई है, जिनके पास पानी और जमीन से न्यूक्लियर मिसाइल दागने की क्षमता है।
- इससे पहले, इस साल फरवरी में यह एलान किया गया था कि INS अरिहंत ऑपरेशन के लिए तैयार है। इस सबमरीन के टेस्ट कई महीनों तक लगातार चले थे।
3 न्यूक्लियर पावर्ड सबमरींस में अरिहंत पहली
- भारत ऐसी कुल 3 न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन बना रहा है। अरिहंत इनमें पहली है।
- आईएनएस अरिहंत 83 MW के लाइट वाटर रिएक्टर की मदद से आगे बढ़ती है।
- इसके कोर (भीतरी हिस्से) को रूस की मदद से डेवलप किया गया है।
- भारत ने आईएनएस अरिहंत को अब तक दुनिया से छिपा रखा है। इसके लिए 1990 में टॉप सीक्रेट ATV (एडवांस टेक्नोलॉजी वेसल) प्रोग्राम शुरू किया गया था।
- इस श्रेणी की दूसरी सबमरीन INS अरिधमन भी करीब-करीब तैयार है। इसे 2018 में नेवी को सौंपा जा सकता है।
भारत के लिए क्यों है जरूरी?
- पाकिस्तान और चीन ने बड़े पैमाने पर न्यूक्लियर वेपन्स तैनात करने की पॉलिसी अपना रखी है।
- हिंद महासागर क्षेत्र में चीन अपनी न्यूक्लियर सबमरीन्स की तैनाती बढ़ा रहा है। भारत की सिक्युरिटी के लिए यह चिंता का विषय है।
भारत ने दुनिया की नजरों से इसे क्यों छिपाया?
- सरकार और नेवी आईएनएस अरिहंत के हर फीचर को बिल्कुल सीक्रेट रखना चाहती हैं।
- इसी साल विशाखापट्टनम में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू ऑर्गनाइज किया गया था। इसमें कई देशों की नेवी ने हिस्सा लिया था।
- नरेंद्र मोदी और प्रणब मुखर्जी भी इस फ्लीट को देखने आए थे। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत ने इस प्रोग्राम में अरिहंत को इसलिए शामिल नहीं किया, क्योंकि फॉरेन वॉर शिप्स में सेंसर और सर्विलांस डिवाइसेस मौजूद थीं। ये अरिहंत के फीचर्स को ट्रेस कर सकती थीं।
दुश्मनों के लिए कितनी खतरनाक है अरिहंत?
- इस पर K-15 या बीओ-5 शॉर्ट रेंज मिसाइलें तैनात हैं। ये 700 किलोमीटर तक टारगेट हिट कर सकती हैं।
- अरहिंत K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से भी लैस है। इनकी रेंज 3500 किलोमीटर तक है।
- यह 6 हजार टन वजनी न्यूक्लियर सबमरीन है।
- इससे पानी के अंदर और पानी की सतह से न्यूक्लियर मिसाइल दागी जा सकती है।
- पानी के अंदर से किसी एयरक्राफ्ट को भी यह निशाना बना सकती है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, और किन देशों के पास हैं न्यूक्लियर सबमरीन्स...
इंडियन नेवी अब उन सुपरपावर्स के क्लब में शामिल हो गई है, जिनके पास हवा और जमीन, दोनों से न्यूक्लियर मिसाइल दागने की क्षमता है।  - फाइल इंडियन नेवी अब उन सुपरपावर्स के क्लब में शामिल हो गई है, जिनके पास हवा और जमीन, दोनों से न्यूक्लियर मिसाइल दागने की क्षमता है। - फाइल
इन देशों के पास हैं न्यूक्लियर सबमरीन्स
 
अमेरिका
- यूएस नेवी की सबमरीन्स को दुनिया की सबसे खतरनाक वाटर मशीन कहा जाता है। अमेरिका की सबसे खतरनाक सबमरीन सी वोल्फ है।
- यह न्यूक्लियर हथियारों से लैस है। ये 1700 किमी की दूरी तक टारगेट हिट कर सकती है।
- बताया जाता है कि फर्स्ट वर्ल्ड वॉर से ही अमेरिका ने पनडुब्बी का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। आज अमेरिका के पास सबसे अधिक सबमरीन मौजूद हैं।
 
रूस
- फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बाद अमेरिका के साथ रूस ने भी अपनी नेवी पावर बढ़ाई है। रूस के पास ग्रेनी और सिएरा जैसी कई सबमरीन हैं, जो न्यूक्लियर हथियारों से लैस हैं।
- सबमरीन से क्रूज मिसाइल लॉन्च करने की खास तकनीक भी रूस के पास है।
 
ब्रिटेन

- अमेरिका और रूस के अलावा ब्रिटेन के पास भी न्यूक्लियर सबमरीन्स हैं। 2010 में ब्रिटेन ने एसटू क्लास नाम से न्यूक्लियर सबमरीन लॉन्च की थी।
- इस सबमरीन में 553एमएम टारपीडो ट्यूब्स हैं, जो 1700 किमी तक पानी के भीतर और जमीन पर हमला कर सकती हैं।
 
चीन
- अपनी नेवी पावर और मजबूत करने के लिए 1978 में चीन ने न्यूक्लियर सबमरीन बनाना शुरू किया। इसके बाद 1981 में चीन की पहली न्यूक्लियर सबमरीन लॉन्च हुई।
- चीन के पास टैंग क्लास, जिन क्लास और जिया क्लास की सबमरीन हैं। कहा जाता है कि चीन अपनी 20 परमाणु सबमरीन हमेशा तैनात रखता है।
 
फ्रांस
- फ्रांस के पास बैराकुडा क्लास की न्यूक्लियर सबमरीन है। इससे पहले उनके पास रुबिस क्लास की सबमरीन्स थीं।
- इन्हें रिप्लेस कर बैराकुडा क्लास सबमरीन शामिल की गई। यह 1000 किमी तक हमला करने में सक्षम है।
भारत ऐसी 3 न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन बना रहा है। अरिहंत इनमें पहली है।  - फाइल भारत ऐसी 3 न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन बना रहा है। अरिहंत इनमें पहली है। - फाइल
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इंडियन नेवी अब उन सुपरपावर्स के क्लब में शामिल हो गई है, जिनके पास हवा और जमीन, दोनों से न्यूक्लियर मिसाइल दागने की क्षमता है।  - फाइलइंडियन नेवी अब उन सुपरपावर्स के क्लब में शामिल हो गई है, जिनके पास हवा और जमीन, दोनों से न्यूक्लियर मिसाइल दागने की क्षमता है। - फाइल
भारत ऐसी 3 न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन बना रहा है। अरिहंत इनमें पहली है।  - फाइलभारत ऐसी 3 न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन बना रहा है। अरिहंत इनमें पहली है। - फाइल
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