चित्रदुर्गा (कर्नाटक). यहां के चल्लाकेरे में रेलवे ने नया ट्रैक बनाने के लिए करीब 25 साल पहले किसानों की जमीन ली थी। लेकिन इसके बदले मुआवजा नहीं दिया था। तीन फरवरी को नाराज किसानों ने एक पैसेंजर ट्रेन पर कब्जा कर लिया। कोर्ट के दखल के बाद रेलवे ने 45 दिन में कम्पनसेशन देने का भरोसा दिया है। आखिर कब से चला आ रहा था मामला...
- रेलवे ने नया ट्रैक बनाने के लिए 1991 में किसानों की जमीन अक्वॉयर की थी।
- रेलवे ने किसानों को मुआवजे का भरोसा दिलाया था। 300 किसानों की जमीन ली गई थी। आरोप है कि इनमें से 200 को तो मुआवजा दिया गया लेकिन 100 को छोड़ दिया गया।
- तीन फरवरी को इन्हीं किसानों ने हरिहरपुरा से बेंगलुरू जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को कब्जे में ले लिया।
कब्जे के बाद क्या हुआ?
- रेलवे के डिविजनल मैनेजर और बाकी अफसर मौके पर पहुंचे। कोर्ट ने भी दखल दिया।
- फंसे हुए पैसेंजर्स को दूसरी ट्रेन से बेंगलुरू भेजा गया। पैसेंजर ट्रेन को आरपीएफ ने अपने कब्जे में ले लिया। यह ट्रेन 7 फरवरी को बेंगलुरू पहुंच सकी।
- किसानों के वकील खालिद अहमद के मुताबिक, “हम 1996 से केस लड़ रहे हैं। रेलवे ने 100 किलोमीटर का ट्रैक बनाने के लिए जमीन ली थी।”
- रेलवे के वकीन ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि रेलवे 45 दिन में 50 किसानों को करीब एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने जा रही है।
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