चेन्नई. कांग्रेस और डीएमके ने तीन साल बाद एक बार फिर तमिलनाडु असेम्बली इलेक्शन के लिए गठबंधन किया है। शनिवार को कांग्रेस लीडर गुलाम नबी आजाद ने डीएमके प्रेसिडेंट एम. करुणानिधि से मीटिंग कर इसका एलान किया। इस नए समीकरण के बाद कांग्रेस ने डीएमके को सबसे भरोसेमंद सहयोगी कहा। इलेक्शन डीएमके की लीडरशिप में लड़ा जाएगा...
- आजाद ने मीडिया को बताया कि फिलहाल सीट बंटवारा अहम नहीं है। हमारा मकसद डीएमके को वापस पावर में लाना है।
- राज्य में असेम्बली इलेक्शन डीएमके की लीडरशिप में लड़ा जाएगा।
- गठबंधन में और सहयोगियों को शामिल करने की जिम्मेदारी करुणानिधि की पार्टी पर होगी।
क्यों अलग हुए थे कांग्रेस और डीएमके?
- डीएमके के अलग होने की दो वजह रहीं। पहला- श्रीलंकाई तमिल और दूसरा टूजी घोटाला।
- केंद्र में यूपीए वन में डीएमके कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के साथ थी। बाद में टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद दोनों दलों के रिश्ते बिगड़ गए।
- डीएमके 2013 में गठबंधन से अलग हो गई थी।
- लेकिन हाल ही में करूणानिधि ने जयललिता की अन्नाद्रमुक के खिलाफ मजबूत गठबंधन खड़ा करने के लिए कांग्रेस को साथ आने का प्रपोजल दिया था।
- तभी से माना जा रहा था कि दोनों पार्टियां दोबारा साथ इलेक्शन लड़ सकती हैं।
- बता दें कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव अपने दम पर लड़ा था, जिसमें उसे खाली हाथ से ही संतोष करना पड़ा, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में डीएमके के साथ लड़ी कांग्रेस 234 सदस्यी विधानसभा के लिए महज पांच सीटें ही हासिल कर पाई थी।
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