नई दिल्ली. वाइस प्रेसिडेंट हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि, ''तीन तलाक का कोई मुद्दा ही नहीं है। कुरान में इसका जिक्र नहीं है। बेवजह चला आ रहा है। बहुत सी औरतों ने अरबी कुरान नहीं पढ़ी। उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं। जो मौलाना ने कह दिया उसे सही मान लिया। इसीलिए कहती हूं कि कुरान पढ़ो।'' सलमा शनिवार को एक मदरसे के प्रोग्राम में शिरकत करने अलीगढ़ पहुंची थीं। इन दिनों ट्रिपल तलाक का मुद्दा चर्चा में है। 11 मई से सुप्रीम कोर्ट की कॉन्स्टीट्यूशन बेंच सुनवाई करेगी। कुरान पढ़ें महिलाएं और खुद समझें...
- ट्रिपल तलाक को लेकर मीडिया के सवाल पर सलमा अंसारी ने कहा, ''कुरान पढ़कर देखिए आपको खुद ही हल मिल जाएगा। कुरान में ऐसी कोई चीज नहीं है, इसे बेवजह का मुद्दा बनाया गया। बहुत-सी औरतें निकलकर आएंगी, जिन्होंने कुरान नहीं पढ़ी। उन्हें क्या पता, जो मौलाना या मुल्ला ने कहा वो मान लिया।''
- ''आंखें बंद कर किसी पर भरोसा मत करो। मैं कहती हूं कि औरतों में ये हिम्मत हो कि खुद अरबी कुरान पढ़ें, ट्रांसलेशन नहीं। कुरान पढ़के देखिए, हदीस पढ़कर देखिए कि रसूल ने क्या कहा। इसे समझें और पता हो कि शरियत क्या कहता है।''
- ''जब आपने कुरान नहीं समझा तो कोई भी आपको गुमराह कर देगा। ट्रिपल तलाक कोई मुद्दा नहीं है। बिल्कुल बेकार की चीज है। कोई तलाक, तलाक, तलाक कह दें और तलाक हो जाए। इसीलिए तो जोर दे रही हूं कि कुरान पढ़िए।''
- ''जब आपने कुरान नहीं समझा तो कोई भी आपको गुमराह कर देगा। ट्रिपल तलाक कोई मुद्दा नहीं है। बिल्कुल बेकार की चीज है। कोई तलाक, तलाक, तलाक कह दें और तलाक हो जाए। इसीलिए तो जोर दे रही हूं कि कुरान पढ़िए।''
तलाक निजी मामला है: लॉ बोर्ड
- मुस्लिम लॉ बोर्ड का कहना है कि चूंकि तलाक निजी मामला है, इसलिए उसे मौलिक अधिकार के तहत लाकर लागू नहीं किया जा सकता।
- बोर्ड ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन्स गलत समझ के चलते फाइल की गई हैं और यह चुनौती मुस्लिम पर्सनल कानून की गलत समझ पर आधारित है।
- बोर्ड का कहना है कि देश का कॉन्स्टिट्यूशन हर कम्युनिटी को धर्म के मामलों में अपनी चीजें खुद तय करने की इजाजत देता है।
- पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे मानवाधिकारों का हनन बताया। कहा था कि क्या मुस्लिम महिलाओं को राहत देने के लिए पर्सनल लॉ में बदलाव किया जा सकता है।
