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JNU विवाद: उमर खालिद के पिता बोले, मुस्लिम होने की वजह से फंसाया जा रहा है बेटे को

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. 9 फरवरी को जेएनयू में कथित तौर पर देशद्रोही नारे लगाने के आरोपी उमर खालिद के पिता ने सैय्यद कासिम इलियास ने कहा कि उनके बेटे को मुसलमान होने की वजह से टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह उमर की सिक्युरिटी का भरोसा दिलाएं तो वह पुलिस के सामने पेश हो सकता है। कन्हैया जैसा बर्ताव न हो...
- इंडिया टीवी से बातचीत में इलियास ने कहा- खालिद से मैं सरेंडर की अपील तभी करूंगा जब मोदी और राजनाथ सिंह उसकी सिक्युरिटी की गारंटी दें।
- उन्होंने कहा- इन दोनों नेताओं को यह तय करना होगा कि पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया के साथ जो हुआ वो उमर के साथ नहीं होगा।
खालिद ने 38 फोन किए जम्मू-कश्मीर
- 3 से 9 फरवरी के बीच उमर खालिद ने 800 फोन किए। इनमें से 38 जम्मू-कश्मीर में किए गए।
- जम्मू-कश्मीर से खालिद के पास 66 फोन कॉल्स आए।
- पुलिस ने उसकी दो महीने की कॉल डीटेल निकाली हैं। दो मोबाइल नंबर्स इस्तेमाल करता है उमर खालिद।
- बांग्लादेश और गल्फ कंट्रीज में भी लगातार बात करता था उमर खालिद।
- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उमर के पिता ने गल्फ कंट्रीज में किसी रिश्तेदार के न होने की बात कही है।
- ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब वहां उसके रिश्तेदार और दोस्त नहीं हैं तो वह वहां किससे बात करता था?
खालिद के पिता ने क्या कहा?
- एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कासिम ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में खालिद को आतंकवादी बताने की कोशिशें गलत हैं।
- कासिम ने आरोप लगाया कि उनके बेटे और कन्हैया को अलग-अलग तरीके से ट्रीट किया जा रहा है।
- उनके मुताबिक, सरकार ‘फूट डालो और राज करो’ की पॉलिसी पर चल रही है।
सोशल एक्टिविस्ट हैं खालिद के पिता
- कासिम ने कहा, "मेरा बेटा पढ़ाई में तेज है और लेफ्ट आइडियोलॉजी को मानता है। उसके खिलाफ मीडिया ट्रायल इसलिए चलाया जा रहा है, क्योंकि अगर पुलिस को एक मुस्लिम चेहरा मिल जाता है तो उसका केस मजबूत हो जाएगा।"
- कासिम एक सोशल एक्टिविस्ट और वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के नेशनल प्रेसिडेंट हैं।
- बता दें कि जेएनयू में देशद्रोही नारेबाजी के मामले में कन्हैया तो अरेस्ट हो चुका है, लेकिन खालिद उसी दिन फरार हो गया था। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ है। हालांकि, पुलिस के सबूत बताते हैं कि 6 से 9 फरवरी के बीच उसके फोन से ढेरी सारी कॉल्स की गईं।
- कासिम ने कहा, "हम उमर और कन्हैया के साथ हैं, लेकिन पुलिस और मीडिया इनके लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल कर रही हैं। मेरे बेटे के तो आतंकी गुटों से रिश्ते बताए जा रहे हैं।"
बेटे से क्या है पिता की अपील?
- कासिम ने कहा, "मैं अपने बेटे से अपील करता हूं कि वह सामने आकर कानून का सामना करे। लेकिन मुझे उसकी सेफ्टी की चिंता सता रही है। अगर उसने देशद्रोही नारे लगाए हैं, तो उसे कानून का सामना करना चाहिए।"
- उन्होंने कहा, "कश्मीर की आजादी को लेकर दूसरे लोगों ने भी नारे लगाए थे। इनमें लेखक और नेता दोनों शामिल हैं। उनके खिलाफ देशद्रोह का केस क्यों नहीं हुआ?"
सिमी में रह चुके हैं उमर खालिद के पिता
- एक और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कासिम बैन किए जा चुके ऑर्गनाइजेशन ‘सिमी’ से जुड़े रहे हैं।
- इस बारे में उन्होंने कहा- "मैंने 1985 में सिमी छोड़ दिया था, तब खालिद पैदा भी नहीं हुआ था। लेकिन मेरे बैकग्राउंड की वजह से भी मेरे बेटे को निशाना बनाया जा रहा है।"
शिमला में मिली फोन की आखिरी लोकेशन
- दिल्ली पुलिस की एक टीम शिमला भेजी गई है। बताया जा रहा है कि खालिद के फोन की आखिरी लोकेशन शिमला में ट्रेस की गई थी।
- जेएनयू मामले में पुलिस को खालिद के अलावा छह और लोगों की तलाश है। इसमें सीपीआई नेता डी. राजा की बेटी भी शामिल है। पुलिस का कहना है कि जिन सात लोगों की तलाश है, उन सभी के मोबाइल स्विच ऑफ हैं।
कौन है उमर खालिद?
- डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन का नेता उमर महाराष्ट्र का रहने वाला है।
- खालिद ने ही 9 फरवरी को संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु की बरसी पर प्रोग्राम करवाया था।
- प्रोग्राम की इजाजत रद्द होने के बाद जब डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन और लेफ्ट के लोग जेएनयू में मार्च कर रहे थे, तब उमर उनकी अगुआई कर रहा था।
- बताया जाता है कि जिस वक्त नारे लग रहे थे, उमर न केवल वहां मौजूद था, बल्कि जेएनयू प्रशासन और एबीवीपी के खिलाफ उसने ही नारेबाजी शुरू की थी।
- कन्हैया कुमार के साथ भी उसे कई वीडियो में देखा गया।
- 11 फरवरी को जब एबीवीपी के खिलाफ लेफ्ट की स्टूडेंट्स यूनियन प्रदर्शन कर रही थी, तो उस वक्त उमर और कन्हैया एक साथ थे।
कई यूनिवर्सिटीज में अफजल के सपोर्ट में शो करना चाहता था खालिद !
- इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के हवाले से मेल टुडे की खबर में दावा किया गया है कि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु के सपोर्ट में कई यूनिवर्सिटीज में शो होने वाला था।
- जेएनयू का स्टूडेंट यूनियन लीडर उमर खालिद इसकी तैयारी कर रहा था।
- खालिद ने अपनी टीमें भी अलग-अलग शहरों में भेजी थी। कश्मीर से एक टीम भी बुलाई थी।
- बताया जा रहा है कि जेएनयू कैम्पस में नारेबाजी के दौरान इस टीम के लड़कों का रोल था। कश्मीर से आए इन लड़कों को जेएनयू में रखा गया था।
- खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, उमर के तिहाड़ जेल में देशद्रोह के आरोप में बंद दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा से रिश्ते हैं।
क्या है विवाद?
- जेएनयू में 9 फरवरी को लेफ्ट स्टूडेंट्स के ग्रुप्स ने संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के को-फाउंडर मकबूल भट की याद में एक प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया था। इसे कल्चरल इवेंट का नाम दिया गया था।
- जेएनयू में साबरमती हॉस्टल के सामने शाम 5 बजे उसी प्रोग्राम में कुछ लोगों ने देश विरोधी नारेबाजी की। इसके बाद लेफ्ट और एबीवीपी स्टूडेंट्स के बीच झड़प हुई।
- 10 फरवरी को नारेबाजी का वीडियो सामने आया। दिल्ली पुलिस ने 12 फरवरी को नारेबाजी के आरोप में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया।
- जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन के प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार को अरेस्ट कर लिया गया। जबकि खालिद अभी फरार है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, जेएनयू में माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता रहा है खालिद...