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फ्री बेसिक्स सर्विस पर बैन से निराश जुकरबर्ग ने कहा- हार नहीं मानेंगे, दुनिया को करेंगे कनेक्ट

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के फैसले से फ्री बेसिक्स प्रोग्राम को भले ही झटका लगा है, लेकिन Internet.org मिशन काफी बड़ा है। हम तब तक काम जारी रखेंगे, जब तक हर शख्स तक इंटरनेट नहीं पहुंच जाता। बता दें कि ट्राई ने नेट न्यूट्रैलिटी का सपोर्ट करते हुए इंटरनेट डाटा की अलग-अलग प्राइसिंग पर सोमवार को ही रोक लगाई है। और क्या कहा मार्क जुकरबर्ग ने...
- अपनी पोस्ट में फेसबुक के सीईओ जुकरबर्ग ने लिखा- "इस फैसले से हम निराश हैं। मैं पर्सनली यह कहना चाहता हूं कि हम भारत और पूरी दुनिया में कनेक्टिविटी के बैरियर्स को तोड़ने के लिए काम करने को लेकर कमिटेड हैं।"
- "यह डिसीजन हमारे Internet.org मिशन को भारत से बाहर नहीं कर सकता। हमारा मिशन दुनिया को ज्यादा ओपन बनाने और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए है।"
- "Internet.org के पास कई प्रोग्राम हैं। जब तक हरेक के पास इंटरनेट का एक्सेस नहीं हो जाता, हम इस पर काम करना जारी रखेंगे।"
- "भारत को जोड़ना हमारा मकसद है। हम इसे छोड़ नहीं सकते हैं, क्योंकि भारत में करोड़ों लोग हैं, जिनके पास इंटरनेट नहीं है। हम जानते हैं कि उन्हें जोड़ने से उनकी गरीबी को दूर करने में मदद मिल सकती है।"
- "इससे लाखों जॉब्स क्रिएट हो सकते हैं और एजुकेशन को लोगों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।"
क्या डिसीजन दिया है ट्राई ने?
1. ट्राई के चेयरमैन राम सेवक शर्मा ने सोमवार को दिल्ली में बताया, "सर्विस प्रोवाइडर अलग-अलग कंटेंट के लिए डिफरेंट टैरिफ नहीं बना सकते। इस बारे में आज नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है, जो तुरंत लागू हो गया है।"
2. "यदि कोई सर्विस प्रोवाइडर अलग-अलग टैरिफ लाता है, तो ट्राई उसे टैरिफ वापस लेने के लिए ऑर्डर दे सकता है। यदि कोई सर्विस प्रोवाइडर नियमों को तोड़ता है तो उसे हर दिन के 50 हजार रुपए देने होंगे।"
3. "कोई भी सर्विस प्रोवाइडर ऐसा कोई कॉन्ट्रैक्ट या एग्रीमेंट नहीं कर पाएगा जो भेदभाव वाले डाटा टैरिफ को प्रमोट करता हो।"
4. "ट्राई के नोटि‍फि‍केशन के मुताबिक, केवल इमरजेंसी सर्वि‍स या पब्लिक सर्वि‍स के लि‍ए डाटा टैरि‍फ में छूट दी जा सकती है।"
5. "ट्राई दो साल या उससे पहले इस नई पॉलिसी की रिव्यू कर सकता है।"
क्या है फ्री बेसिक्स?
- इस सर्विस को कोई भी यूजर अपने एंड्रॉइड स्मार्टफोन पर यूज कर सकता था। यहां उसे लिमिटेड सर्विस मिलती।
- फेसबुक ने फ्री बेसिक्स या इंटरनेट डॉट ओआरजी ऑफिशियली शुरू किया था, लेकिन कई एक्सपर्ट्स ने इसे नेट न्यूट्रैलिटी के खिलाफ बताया था। इस पर बहस शुरू हो गई थी।
- विरोध के बाद फेसबुक ने internet.org को Free Basics इंटरनेट के नाम से री-ब्रांड किया।
- पहले यह सर्विस तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गोवा, आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल और तेलंगाना के यूजर्स के लिए लॉन्च की गई थी।
- बाद में रिलायंस ने पूरे देश के सब्सक्राइबर्स के लिए शुरू कर दिया।
- कोई भी मोबाइल यूजर्स फेसबुक की फ्री बेसिक्स ऐप के जरिए फेसबुक, न्यूज, क्रिकेट, जॉब्स, ट्रेन, फ्लाइट्स शेडयूल, हेल्थ, एस्ट्रोलॉजी, ओएलएक्स जैसी सीमित साइट्स और ऐप्स को फ्री में एक्सेस कर सकता था। यूजर्स को इनका इंटरनेट चार्ज भी नहीं देना पड़ता।
- फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने एक पोस्ट कहा था, "कम्युनिकेशन को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे एजुकेशन, हेल्थ और जॉब में बहुत मदद मिलेगी।"
- ट्राई के आदेश के बाद दिसंबर में रिलायंस ने फ्री बेसिक्स को होल्ड पर रख दिया था।
क्या था एयरटेल जीरो?
- इसके पहले एयरटेल ने अपने यूजर्स के लिए ‘एयरटेल ज़ीरो’ प्लान का फ्लिपकार्ट जैसी कुछ कंपनियों के साथ करार किया था। 6 अप्रैल 2015 को इसे लॉन्च किया गया था।
- बताया गया था कि यह प्लान लेने से यूजर्स कुछ ऐप्स का फ्री में इस्तेमाल कर पाएंगे।
- ऐसे ऐप्स का चार्ज यूजर से न लेकर उन कंपनियों से लिया जाएगा, जिनका एयरटेल से करार होगा।
- इसका इंटरनेट कम्युनिटी ने विरोध किया। अप्रैल में ही सोशल मीडिया पर विरोध के बाद फ्लिपकार्ट ने जीरो प्लान से हाथ खींच लिए थे।
- 51 हजार लोगों ने फ्लिपकार्ट के ऐप की रेटिंग घटाकर 1 कर दी थी। हजारों लोगों ने ऐप ही डिलीट कर दिया था।
- क्लियरट्रिप कंपनी ने भी इंटरनेट डॉट ओआरजी से खुद को अलग कर लिया था।
- इससे एक तरह से यह स्कीम खत्म हो गई। हालांकि, एयरटेल ने ऑफिशियली इससे विड्राॅ नहीं किया।
किसे होगा नुकसान ?
- रिलायंस के फ्री बेसिक्स सर्विस और एयरटेल के जीरो सर्विस को।
- इससे पहले अप्रैल 2015 में ट्राई ने डाटा सर्विस के लिए डिफरेंट प्राइसिंग के मुद्दे पर लोगों से सजेशन मांगे थे। इसके लिए अपनी वेबसाइट पर कन्सल्टेशन पेपर डाला था।
- अथॉरिटी के मुताबिक, 24 लाख लोगों ने इस पर अपने रिएक्शन दिए हैं।
क्या है नेट न्यूट्रैलिटी?
- Net Neutrality यानी अगर आपके पास इंटरनेट प्लान है, तो आप हर वेबसाइट पर हर तरह के कंटेंट को एक जैसी स्पीड के साथ एक्सेस कर सकें।
- Neutrality के मायने ये भी हैं कि चाहे आपका टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर कोई भी हो, अाप एक जैसी ही स्पीड पर हर तरह का डाटा एक्सेस कर सकें।
- कुल मिलाकर, इंटरनेट पर ऐसी आजादी जिसमें स्पीड या एक्सेस को लेकर किसी तरह की कोई रुकावट न हो।
- Net Neutrality टर्मिनोलॉजी का इस्तेमाल सबसे पहले 2003 में हुआ। तब काेलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टिम वू ने कहा था कि इंटरनेट पर जब सरकारें और टेलिकॉम कंपनियां डाटा एक्सेस को लेकर कोई भेदभाव नहीं करेंगी, तब वह Net Neutrality कहलाएगी।
- नेट कम्युनिटी का दावा है कि अगर कंपनियों फ्री बेसिक्स जैसा मॉडल अपनातीं तो यूजर्स को हर एक्स्ट्रा साइट या ऐप के लिए अलग चार्ज देना पड़ता या उन्हें नेट की स्पीड काफी कम मिलती।
TRAI ने क्या किया?
- ट्राई ने डाटा सर्विस के लिए डिफरेंट प्राइस के लिए लोगों से सजेशन मांगे थे। इसके लिए अपनी वेबसाइट पर कन्सल्टेशन पेपर डाला था।
- इसमें 20 तरह के सवालों के जवाब लोगों से मांगे गए थे। कई अवेयरनेस ग्रुप ने इन्हें सिम्पलिफाई करने के टूल्स भी बना लिए थे।
- 6 लाख से ज्यादा लोगों ने ट्राई को नेट न्यूट्रैलिटी के फेवर में अपने जवाब भेजे थे।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, जुकरबर्ग का पोस्ट और टेलिकॉम कंपनियां क्या चाहती हैं...?
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