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धरने को लेकर आम आदमी पार्टी के भीतर भी यस-नो

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी के धरने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्‍ली सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 6 हफ्ते में नोटिस का जवाब देने को कहा है। वहीं, इस मामले में दिल्‍ली पुलिस को भी फटकार लगाई है और कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि बतौर मुख्‍यमंत्री केजरीवाल ने धरने पर बैठ कर कानून का उल्‍लंघन किया।
सुप्रीम कोर्ट इस बात का फैसला करेगा कि क्‍या संवैधानिक पद पर रहते हुए धरने पर बैठ कर दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कानून का उल्‍लंघन किया और इसके लिए वह सजा के हकदार हैं?
केजरीवाल के धरने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस से इस सवालों के जवाब मांगे हैं-
1. जब धारा 144 लगी हुई थी, तब पुलिस ने केजरीवाल और उनके समर्थकों को धरना क्‍यों देने दिया?
2. केजरीवाल और उनके समर्थकों द्वारा नियमों का उल्‍लंघन करने पर पुलिस ने क्‍या कार्रवाई की है?
इन सवालों का जवाब देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को 31 जनवरी तक का समय दिया है। केजरीवाल ने सोमवार को दिल्‍ली पुलिस के कुछ अफसरों पर कार्रवाई की मांग करते हुए धरना दिया था। दो पुलिसवालों को छुट्टी पर भेजे जाने के आश्‍वासान के बाद मंगलवार शाम उन्‍होंने धरना खत्‍म किया। उनके धरने पर बैठने को लेकर काफी आलोचना हुई।
आम आदमी पार्टी दिल्‍ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती के इस्‍तीफे की मांग को लेकर भी दबाव में है। भाजपा इस मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस भी भारती के इस्‍तीफे की मांग कर रही है। हालांकि, 'आप' ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया है।
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