नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आंदोलनों से घिर गए हैं। आम आदमी पार्टी बनाने से पहले जनलोकपाल आंदोलन के दौरान धरना और अनशन को केजरीवाल ने अपना हथियार बनाया था, लेकिन आज खुद उनकी सरकार धरना और अनशन के कारण मुसीबतों से घिर गई है। दिल्ली में अस्थाई शिक्षक पक्की नौकरी के लिए पहले से धरने पर बैठे थे, लेकिन अब अस्थाई तौर पर डीटीसी में कार्यरत कर्मचारी भी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं। कानून मंत्री
सोमनाथ भारती के इस्तीफे की मांग को लेकर भाजपा नेता भी सोमवार को धरने पर बैठे।
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता डॉक्टर हर्षवर्धन ने धरने का नेतृत्व किया। इसके अलावा आम आदमी पार्टी से निकाले गए विधायक विनोद कुमार भी सोमवार को धरने पर बैठे। हालांकि, वह तीन घंटे में धरने से उठ गए, जिससे केजरीवाल की मुश्किल थोड़ी कम हुई, लेकिन उनके खिलाफ चल रहे बाकी तीन आंदोलन थमते नहीं दिख रहे हैं। जहां, अस्थायी शिक्षक 13 दिन से धरने पर बैठे हैं, वहीं, अस्थायी डीटीसी कर्मचारियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन अनशन एलान कर दिया। इसके अलावा भाजपा ने भी भारती के इस्तीफे तक मुहिम जारी रखने की घोषणा की है। अब देखना होगा कि आंदोलनों की राजनीति करते आए केजरीवाल इन आंदालनों से कैसे निपटते हैं?