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महिला की आपबीती: हथियारबंद चार लोगों ने बनाया था रेप का शिकार

9 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. किसी भी महिला के लिए अपने ऊपर हुई ज़्यादतियों को बयां करना आसान नहीं होता है। लेकिन 'ईयर ऑफ द टाइगर' नाम के उपन्यास की लेखक सोहेला अब्दुलाली ((तस्वीर में) ने यह साहस दिखाया है। वे खुद रेप की शिकार हैं। (केमिकल या सर्जिकल? नपुंसक बनाने के तरीके पर बहस)
न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित लेख में अपनी आपबीती बयां करते हुए सोहेला ने लिखा है, '32 साल पहले जब मैं 17 साल की थी, तब मैं मुंबई में रहती थी। उस दौरान मेरे साथ गैंगरेप हुआ था और मैं मरते-मरते बची थी। घटना के तीन साल बाद जब पूरे मामले को लेकर समाज में चुप्पी पसरी हुई थी भ्रम का माहौल था, तब मैंने अपने नाम से एक लेख महिलाओं की पत्रिका मानुषी में लिखा था। इस लेख ने मेरे परिवार में तो खलबली पैदा की ही थी, इसने तब के नारीवादी आंदोलनों पर भी खासा असर डाला था। लेकिन इसके बाध धीरे-धीरे ये बातें भूला दी गईं। तभी पिछले हफ्ते मैंने अपने ईमेल चेक किया तो पाया कि दिल्ली गैंग रेप (दिल्‍ली गैंग रेप: क्या हुआ था उस रात ) को लेकर किसी ने एक आर्टिकल लिखा है, जो इंटरनेट पर तेजी से पढ़ा जा रहा है। इस मामले में गैंगरेप की शिकार लड़की को मिलने वाले समर्थन से जुड़े ढेरों संदेश मुझे मिले हैं।' (डॉक्टर ने बयां की दरिंदगी की असली कहानी!)
आगे की स्लाइडों में पढ़िए, सोहेला की आपबीती: रात भर नाबालिग से किया गैंग रेप, सुबह लहूलुहान छोड़ भागे!