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अलागिरी ने करुणानिधि के बयानों का दिया जवाब; कहा मैं सपने में भी नहीं सोच सकता

7 वर्ष पहले
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अलागिरी को डीएमके पार्टी से निलंबित किए जाने के चार दिन बाद पार्टी प्रमुख करुणानिधि ने 28 जनवरी 2014 को समाचारपत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि अलागिरी ने ऐसे बयान दिए थे कि एक पिता इसे किसी तरह से सहन नहीं कर सकता। करुणानिधि के अनुसार, अलागिरी ने कहा था कि स्टालिन तीन महीने में मर जाएंगे। यह सीधे तौर पर पार्टी पर नियंत्रण के लिए खूनी संघर्ष का संकेत था। गौरतलब है कि डीएमके में नेतृत्व को लेकतर 2010 से ही विवाद चल रहा है। पहले भी अलागिरी ने करुणानिधि के द्वारा स्टालिन को पार्टी का नेतृत्व सौंपे जाने के संकेत दिए जाने का डटकर विरोध किया था, लेकिन अब यह विरोध सतह पर आ गया है।

डीएमके प्रमुख करुणानिधि के मीडिया में बयान आने के बाद आज 29 जनवरी 2014 को अलागिरी ने मदुरै में मीडिया से कहा है कि वे अपने पिता व पार्टी प्रमुख पहले मरना पसंद करेंगे। उनके आंसू मेरे शव पर होने चाहिए; मेरी इच्छा है कि वे 100 साल से अधिक जीवित रहें। अलागिरी ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि ऐसा मैं सपने में भी नहीं सोच सकता। यह मेरे पिता और पार्टी प्रमुख करुणानिधि के द्वारा मेरे जन्मदिन पर दिया गया उपहार समझिए। उल्लेखनीय है कि 30 जनवरी को अलागिरी का जन्मदिन है।

अलागिरी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों को मैं फैक्स से भेजा करता था जिस पर ध्यान देने और कार्यवाई करने की बजाए इसे कारपेट के नीचे रख दिया जाता था। कार्यकर्ताओं के हक की लड़ाई का मुझे यह सिला मिला। अलागिरी ने पार्टी महासचिव दुरईमुरुगन से पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों को दूर करने का निवेदन किया। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी प्रमुख ने मेरे निलंबन के संबंध में मीडिया को संबोधित करते हुए कल जो बातें कही उनमें से कोई बात निलंबन के लिए दिए नोट में नहीं कही गई थी। इसे मुरासोली में प्रकाशित किया गया है। करुणानिधि के द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में उन्होंने कहा कि इससे मुझे काफी दुख हुआ है। पार्टी के कार्यकर्ता मुझे अच्छी तरह से जानते हैं और मैं हमेशा उनके सुख-दुख में साथ रहा हूं।

इस बीच चेन्नई के विभिन्न हिस्सों में आज अलागिरी के उस वक्तव्य की निंदा करते हुए पोस्टर चिपकाए गए हैं जिसमें उन्होंने कथित तौर पर स्टालिन के बारे में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा, अलागिरी के पुतले को भी जगह-जगह जलाया गया।