आइडिएशन सेल। पिछले कुछ समय से बिहार के राजनीतिक समीकरण में तेज़ी से बदलाव देखा गया है। 19 मई, 2014 को नीतीश कुमार ने जिस जीतनराम मांझी को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया था वही मांझी अब बाग़ी तेवर अपनाते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में जदयू में नया नेता चुने जाने, जदयू के टूटने और बिहार विधानसभा भंग किए जाने जैसी बातें काफी चर्चा में हैं। वैसे मांझी के राजनीतिक बयान और कई प्रशासनिक फ़ैसले भी नीतीश और जदयू के लिए असहज स्थिति पैदा करते रहे हैं। यही वजह है कि जदयू अब मांझी को मुख्यमंत्री के रूप में और नहीं देखना चाहती और उनसे किनारा करती दिख रही है। हमेशा नीतीश का गुणवान करने वाले मांझी भी अपना विरोध होता देख अचानक जदयू नेताओं के खिलाफ खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि मांझी की इस हिम्मत के पीछे कहीं न कहीं बीजेपी की ताकत काम कर रही है।
आइए जानते हैं, मांझी के इस बगावती तेवर के पीछे की असल वजह और उसके मायने...
पहले क्या बोले थे मांझी
नीतीश भगवान हैं... (19 नवंबर, 2014)
मांझी ने कहा था उनके घर में भगवान की एक भी फोटो नहीं है। मांझी यहीं चुप नहीं रहे, उन्होंने कहा, 'मेरे कमरे में एक ही फोटो है और वह है नीतीश कुमार की'।
अब क्या कहा...
नीतीश भीष्म पितामह हो गए हैं...(6 फरवरी, 2015 )
कभी नीतीश को भगवान बताने वाले मांझी ने सहरसा के सत्तरकटैया में आरपार की लड़ाई का ऐलान करते हुए कहा कि नीतीश कुमार जेडीयू में भीष्म पितामह की भूमिका में हैं, जो उनपर हो रहे अत्याचर को देख रहे हैं पर कुछ बोल नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा- महाभारत में भी जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था तब भीष्म पितामह मौन थे। इसी वजह से महाभारत हुआ था।
क्या हैं मायने
- कल तक मांझी पर रिमोट मुख्यमंत्री का आरोप लगाने वाली बीजेपी अब मांझी को सपोर्ट दे रही है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान बीजेपी के
सुशील कुमार मोदी ने मांझी को यह कहते हुए शह दी कि वे ‘हिम्मत’ दिखाएं और विधानसभा भंग करने की अनुशंसा करें। ऐसा करके छह महीने तो वह वैसे भी केयरटेकर मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।
- माना जा रहा है कि मांझी की ‘हिम्मत’ के पीछे भाजपा की ताकत काम कर रही है। यही वजह है कि मांझी ने जदयू आलाकमान के निर्देश को भी ठेंगा दिखा दिया है। मांझी ने शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में शरद यादव और नीतीश कुमार को चुनौती देते हुए विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, यह प्रस्ताव खारिज हो गया। एेसे में अब बिहार विधानसभा का भविष्य राज्यपाल के फैसले पर टिका हुआ है।
आगे की स्लाइड़स में पढें, मांझी और बीजेपी क्यों कर रहे हैं एक-दूजे का सपोर्ट...