नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद बीजेपी के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में भी मंथन का दौर जारी है। गुरुवार को आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने बीजेपी के तीन केंद्रीय मंत्रियों को बुलाकर उनसे जवाब-तलब किया। रविशंकर प्रसाद, स्मृति ईरानी और निर्मला सीतारमण से दिल्ली स्थित संघ के दफ्तर ‘केशव कुंज’ में बीजेपी के नेगेटिव कैंपेन को लेकर तीखे सवाल किए गए। सीतारमण से पूछा गया कि उन्होंने
केजरीवाल के खिलाफ ‘चोर’ शब्द का इस्तेमाल क्यों किया? दरअसल, संघ का मानना है कि बीजेपी के नेगेटिव कैंपेन का बेहद उलटा असर हुआ और चुनाव प्रचार के दौरान ही जीत-हार तय होती नजर आई। स्मृति ईरानी के खिलाफ संघ से जुड़े कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि उन्होंने संघ से जुड़े कुछ लोगों के सुझावों पर ध्यान नहीं दिया। बीजेपी के कुछ कार्यकर्ताओं ने मंत्रियों के अहंकार भरे रवैये को लेकर शिकायत की थी और कुछ ने कहा था कि प्रचार के दौरान उनकी जगह बाहर से आए नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं को तरजीह दी गई।
एक सूत्र ने बताया कि इस पूरी कवायद के पीछे वजह यह है कि इस चुनाव में की गई गलतियों से सीख लेकर भविष्य में उनका दोहराव रोका जाए और सही रास्ते पर आगे बढ़ा जाए। जिन लोगों से भागवत ने मुलाकात की, उनमें दिल्ली बीजेपी के बड़े नेता जगदीश मुखी भी शामिल हैं। मुखी को एक समय पार्टी के सीएम कैंडिडेट के तौर पर देखा जाता था। संघ प्रमुख ने दिल्ली में तैनात संघ के प्रचारकों से भी बीजेपी की हार पर रिपोर्ट मांगी है। इन रिपोर्ट्स पर अगले महीने नागपुर में होने वाली संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में चर्चा होगी। इसके अलावा संघ-बीजेपी की समन्वय समिति की बैठक भी इसी रविवार को दिल्ली में होने जा रही है। गुरुवार को हुई चर्चा में भागवत के साथ संघ के जो अन्य नेता बैठक में शामिल हुए, उनमें भैयाजी जोशी, दत्तात्रेय होसबोले, कृष्ण गोपाल और सुरेश
सोनी प्रमुख हैं। इनके अलावा इंद्रेश कुमार, रामलाल और शिव प्रकाश भी भागवत के साथ मौजूद रहे।