नई दिल्ली. कई दक्षिणपंथी संगठनों की तरफ से हुई आलोचना के बाद गुजरात सरकार ने नरोदा पाटिया दंगा कांड में पैरवी कर रहे एसआईटी के सरकारी वकील से कहा है कि वह उस निर्देश पर अमल न करें जिसमें बीजेपी नेता माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी के लिए फांसी की सज़ा की अपील करने को कहा गया था। पिछले महीने गुजरात सरकार के कानून विभाग ने एसआईटी से कहा था कि वह हाई कोर्ट में अपील कर माया कोडनानी और बाबू बजरंगी के खिलाफ फांसी की सज़ा की मांग करे।
पिछले साल एक विशेष कोर्ट ने गुजरात सरकार में मंत्री रहीं माया कोडनानी को 28 साल जेल की सज़ा सुनाई थी। माया को भीड़ को भड़काने का दोषी पाया गया था। अदालत ने माना था कि माया ने भीड़ को भड़काया था जिसकी वजह से नरोदा पाटिया में एक समुदाय के 97 लोगों की हत्या की गई।
दूसरी तरफ, यूपीए सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत मुद्दे को जीवंत रखने के लिए भाजपा ने नरेंद्र मोदी को हिंदुत्व जैसे मुद्दे से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। पार्टी की यह चिंता भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी मूड को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में बटने से रोकना है। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने जितने भ्रष्टाचार किए उसके खिलाफ देशव्यापी आक्रोश है। इसी मुद्दे को पार्टी के सभी नेता उठा रहे हैं। यह अहम मुद्दा है। क्योंकि महंगाई और भ्रष्टाचार से देश के सभी वर्गों और संप्रदाय के लोग कराह रहे हैं। ऐसे में विरोधी दल ध्यान बंटाने के लिए मुद्दों को डायवर्ट करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे भाजपा सफल नहीं होने देगी।
सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व ने नरेंद्र मोदी को भी यह सलाह दी है कि वह अपने भाषण का दायरा विकास तक ही सिमित रखें। हिंदुत्व के मुद्दे पर सार्वजनिक मंचों या मीडिया के सामने बोलने से परहेज करने की उन्हें सलाह दी गई है। विदित हो कि भाजपा लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी को देश भर में भाषण के लिए उतारना चाहती है लेकिन उन्हें इस बात के लिए सावधान किया गया है कि भाषण में ऐसा कुछ न बोलें जिससे भ्रष्टाचार और महंगाई का मुद्दा पीछे छूट जाए, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का माहौल तैयार हो।
शिवसेना की पीड़ा
हिंदुत्व के मुद्दे पर मोदी की चुप्पी से शिवसेना खफा है। पार्टी के मुख्यपत्र सामना में हिंदुत्व पर चुप्पी के लिए मोदी की आलोचना की गई है और कहा गया है कि 80 करोड़ बहुसंख्यक समाज की बात करने की जगह छद्म धर्मनिरपेक्ष के रूप में खुद को पेश करना आत्मघाती हो सकता है। कर्नाटक चुनाव में मोदी स्टार प्रचारक थे लेकिन वहां पार्टी की हार से साफ है कि भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं चल रहा है इसलिए हिंदुत्व के मुद्दे पर लौटना भाजपा और शिवसेना के लिए जरूरी है।
जेटली ने किया था आगाह
पिछले दिनों भाजपा की बैठक में राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कहा था कि 2009 का लोकसभा चुनाव अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण की वजह से हुआ था। ऐसे में पार्टी को यह ध्यान रखना होगा कि ऐसा कोई वातावरण नहीं बनने दें जिससे ध्रुवीकरण का माहौल बने क्योंकि भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है।