नई दिल्ली. भाजपा के भगवा तेवरों वाले सांसद छोटे-छोटे विपक्षी दलों को एकजुट होने का मौका देकर नेतृत्व की तकलीफ बढ़ा रहे हैं। पहले मंत्री निरंजन ज्योति ने और अब साक्षी महाराज ने सरकार को मुश्किल में डाल दिया। विपक्ष के कड़े विरोध के चलते ही नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ बताने वाले बयान के लिए शुक्रवार को साक्षी महाराज को माफी मांगनी पड़ी।
दोनों सदनों में काम शुरू होते ही साक्षी महाराज के बयान पर कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने हंगामा किया। राज्यसभा में हुसैन दलवाई ने शून्यकाल में मामला उठाया। इसके चलते दो बार सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। लोकसभा में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया और अन्य के नेतृत्व में सदस्यों ने गोडसे सरकार हाय-हाय के नारे लगाए।
सदस्यों के गर्भगृह में आकर नारेबाजी और हंगामे के चलते कई बार काम रोकना पड़ा। कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी भी खड़े होकर नारेबाजी करती देखी गईं। इस दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली व संसदीय मामलों के मंत्री वेंकैया नायडू असहाय नजर आए। साक्षी महाराज ने गुरुवार को संसद के बाहर कहा था, ‘गोडसे ने गलती से बापू की हत्या कर दी थी। वह देशद्रोही नहीं थे। वह भी राष्ट्रभक्त थे।'
साक्षी महाराज को चार बार देनी पड़ी सफाई
साक्षी महाराज को चार बार बयान के संबंध में स्पष्टीकरण देना पड़ा। शुरू में उन्होंने माफी तो मांगी, साथ ही कांग्रेस पर तंज भी कस दिया। कहा, ‘मैं बापू का सम्मान करता हूं। सदन का सम्मान करता हूं। मैंने तुरंत ही बयान को वापस ले लिया था। बापू की असली हत्या तो 1984 के सिख दंगों के दौरान हुई है। मैं अपने शब्द वापस लेता हूं।’
सरकार ने की निंदा
विपक्ष को शांत करने के लिए संसदीय कार्यमंत्री नायडू ने कहा, ‘गांधी जी के हत्यारे के बारे में
दिए गए बयान की सरकार निंदा करती है।
प्रधानमंत्री नाराज | सूत्रों ने कहा कि सरकार को संसद में कई अहम बिल और अध्यादेश लाने हैं। लेकिन विपक्ष के विवादित मुद्दों पर हंगामे के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है। मोदी भी पार्टी सांसद के व्यवहार से नाराज हैं।
क्या माफी अावर शुरू करें : स्पीकर
लोकसभा में हालात ऐसे हो गए कि स्पीकर सुमित्रा महाजन को कहना पड़ा कि क्या अब माफी अावर शुरू करें। उन्होंने ही आखिर में साक्षी महाराज से कहा, ‘एक लाइन में वह माफी मांग कर मामले को समाप्त करें।’