नई दिल्ली: देश की 33 विधानसभा सीटों और 3 लोकसभा सीटों के नतीजे मंगलवार को आ गए। लोकसभा चुनावों में चमत्कारी प्रदर्शन के बाद केंद्र की सत्ता में आई बीजेपी को इसमें तगड़ा झटका लगा। जिस यूपी में उसने अपने सहयोगी गठबंधन के साथ 80 में से 73 सीटें हासिल की थीं, वहां
उपचुनाव की 11 में से महज 3 सीटें मिलीं। खास बात यह कि ये सभी 11 सीटें पहले बीजेपी के पास ही थीं। राजस्थान और गुजरात में भी यही हाल रहा, जहां कांग्रेस ने उसके दबदबे को चुनौती देते हुए उसकी कुछ सीटें अपने खाते में कर लीं। हालांकि, पश्चिम बंगाल और असम से बीजेपी को अच्छी खबर मिली, जहां उसका खाता खुल गया। आइए, जानें उप चुनाव नतीजों की 7 खास बातें
1 पीएम नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट वाराणसी में आने वाले रोहनिया विधानसभा सीट पर बीजेपी को शिकस्त का सामना करना पड़ा। यहां बीजेपी की सहयोगी पार्टी अपना दल के कृष्ण पटेल को सपा के महेंद्र पटेल ने 14 हजार वोटों से हराया।
2 पश्चिम बंगाल की 2 सीटों पर हुए उपचुनाव में एक बीजेपी को मिली। बसीरहाट सीट पर मिली इस जीत के साथ बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में 15 साल बाद एंट्री की। आखिरी बार 1999 में बादल भट्टाचार्य ने बीजेपी-तृणमूल प्रत्याशी के तौर पर अशोकनगर सीट से चुनाव जीता था।
3 पश्चिम बंगाल की जिस बसीरहाट सीट पर बीजेपी को जीत मिली है, बांग्लादेश सीमा से सटे इस क्षेत्र में 63 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। जानकार मानते हैं कि शारदा घोटाले में राज्य सरकार की खराब हुई छवि और पशु तस्करी को लेकर हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बीजेपी की जीत का कारण रहा।
4 यूपी में बीजेपी के ध्रुवीकरण का फॉर्म्युला उप चुनाव में नहीं चला। मुरादाबाद की ठाकुरद्वारा सीट, जिस इलाके में कुछ दिन पहले धर्मस्थल पर लाऊडस्पीकर लगाने को लेकर सांप्रदायिक विवाद हुआ था, बीजेपी चुनाव हार गई। यहां सपा प्रत्याशी करीब 1 लाख 20 वोट से जीता।
5 यूपी की सहारनपुर सीट, जहां हाल ही में सांप्रदायिक दंगे हुए, उप चुनाव में भले ही यहां बीजेपी को जीत मिली, लेकिन समाजवादी पार्टी का वोट शेयर यहां बढ़ गया। 2012 चुनाव में यहां सपा प्रत्याशी चौथे नंबर पर था, लेकिन इस बार सपा कैंडिडेट दूसरे नंबर पर आ गया। बीजेपी प्रत्याशी महज 26 हजार वोट से जीता।
6 गुजरात की वडोदरा लोकसभा सीट पीएम मोदी द्वारा छोड़ने जाने के बाद खाली हो गई थी। यहां हुए उप चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी को 3.29 लाख से अधिक वोट से जीत मिली। हालांकि, यह मोदी की जीत के मुकाबले फीकी है, क्योंकि मोदी इस सीट पर 5 लाख 70 हजार वोटों से जीते थे। यानी इस सीट पर बीजेपी का वोट शेयर कम हुआ।
7 राजस्थान में उप चुनाव के नतीजे भी बीजेपी के लिए चौंकाने वाले रहे। यहां राज्य की सत्ता में पार्टी के होने के बावजूद बीजेपी ने तीन सीटें गंवा दी। खास बात यह कि नसीराबाद सीट पर बीजेपी को महज 386 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इस विधानसभा सीट पर सीएम वसुंधरा राजे ने 2 बार रैली की थी।
8 सपा सुप्रीमो
मुलायम सिंह यादव द्वारा मैनपुरी सीट खाली करने के बाद वहां से उनके 27 वर्षीय पोते तेज प्रताप सिंह यादव बतौर सपा प्रत्याशी खड़े हुए और जीते। इस तरह से तेज प्रताप मुलायम के परिवार की तीसरी पीढ़ी के पहले और परिवार के सातवें सदस्य बने गए हैं, जो संसद पहुंचे हैं। इसके अलावा, ऐसा पहली बार हुआ है जब एक परिवार की तीन पीढ़ी के पांच सदस्य एक ही लोकसभा में सदस्य चुने गए। ये हैं- दादा मुलायम सिंह यादव, उनके दो भतीजे अक्षय और धर्मेंद्र, बहू डिंपल और पोते तेज प्रताप।
9 यूपी के जिन 11 सीटों पर उपचुनाव हुए, वहां बीजेपी का वोट शेयर 38.4 पर्सेंट है, जो पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 3.8 पर्सेंट ज्यादा है। हालांकि, अगर इन आंकड़ों की तुलना लोकसभा चुनावों से करें तो कुछ और तस्वीर बनती है। 4 महीने पहले आम चुनाव के मुकाबले इन 11 सीटों पर हुए उपचुनाव में पार्टी के वोट शेयर में 10.7 प्रतिशत की कमी आई है।
10 यूपी के जिन 11 सीटों पर उपचुनाव हुए, उनमें समाजवादी पार्टी के वोट शेयर में पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 28.2 पर्सेंट का इजाफा हुआ है। वहीं, इस साल हुए लोकसभा चुनावों के मुकाबले उसके वोट शेयर में 26.3 पर्सेंट की बढ़ोत्तरी हुई है।
11 यूपी के जिन सीटों पर उपचुनाव हुए, वहां मायावती की पार्टी बीएसपी का लोकसभा चुनाव में वोट शेयर 14.5 पर्सेंट और 2012 विधानसभा चुनावों में 20.2 पर्सेंट था। बीएसपी ने इस बार प्रत्याशी खड़े नहीं किए। वहीं, कांग्रेस के उप चुनाव में वोट शेयर की बात करें तो उसमें बीते लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2.2 पर्सेंट, जबकि 2012 विधानसभा चुनाव के मुकाबले 7.2 पर्सेंट की कमी आई है।
12 राजस्थान उपचुनाव ने पिछले 62 साल के राजनीतिक ट्रेंड को बदल दिया है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के एक या दो साल बाद जितने भी उप चुनाव हुए हैं उनमें सत्तारूढ़ पार्टी को ही फायदा मिलता रहा है, लेकिन इस बार परिणाम इसके उलट आए हैं। 1952 में पहली विधानसभा की 14 सीटों के उप चुनाव हुए जिनमें 12 सीटें सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस की झोली में गई। प्रदेश में 1951 से लेकर 1972 तक एक ही पार्टी की सरकार रही। इस दौरान जितने भी उप चुनाव हुए उनमें कांग्रेस को ही फायदा मिला। आपातकाल के बाद प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बनी ऐसे में 1978 में दो सीटों के लिए हुए उप चुनाव में ये दोनों सीटें जनता पार्टी के खाते में गई।
13 गुजरात में जिन 9 सीटों पर उपचुनाव हए, वहां पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 51.3 पर्सेंट था। हाल के लाेकसभा चुनावों की बात करें तो इन सीटों पर बीजेपी का वोट शेयर बढ़कर 61.5 पर्सेंट हो गया। उपचुनाव नतीजों के बाद उसका वोट शेयर घटकर 51 पर्सेंट हो गया। यह 2012 के आंकड़े से भी कम है।
14 पश्चिम बंगाल और असम में 1-1 सीट मिलने की वजह से बीजेपी के लिए राहत की बात है। वोट शेयर की बात करें तो पश्चिम बंगाल की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 33 पर्सेंट है, जो 2011 के असेंबली चुनाव के मुकाबले 28.9 पर्सेंट ज्यादा है। इन दोनों सीटों पर वोट शेयर के मामले में बीजेपी दूसरे नंबर पर है। तृणमूल के लिए थोड़ी चिंता की बात है। 2011 के मुकाबले उसके वोट वेयर में 7.7 पर्सेंट की कमी आई है।
15 असम में बीजेपी का वोट शेयर 34.4 पर्सेंट है, जो कांग्रेस या एयूडीएफ के मुकाबले ज्यादा है। जिन तीन सीटों पर उपचुनाव हुए, उनमें उसके वोट शेयर में 2011 के मुकाबले 13.3 पर्सेंट की बढ़ोत्तरी हुई है। हालांकि, यह हालिया लोकसभा चुनाव के वोट शेयर के मुकाबले 4.5 पर्सेंट कम है।
आगे की स्लाइड में पढ़ें: विधानसभा नतीजों के पीछे की वजह