(फाइल फोटो: मंगलवार को मतगणना के दौरान सूना पड़ा भाजपा दफ्तर।)
नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की करारी हार के बाद पार्टी के अंदर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। बिहार के दरभंगा से सांसद कीर्ति आजाद ने कहा है कि दिल्ली में हार के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। वहीं शिवसेना, अकाली दल जैसे सहयोगी दलों और पीडीपी ने भी बीजेपी को नसीहत दी है। कीर्ति आजाद ने कहा है कि पार्टी ने दिल्ली में अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। एक चैनल को दिए इंटरव्यू में आजाद ने कहा कि उन्होंने ऐसी हार के बारे में सपने में भी नहीं सोचा था। उन्होंने कहा कि पॉजिटिव की जगह नेगेटिव कैंपेन चलाना बहुत बड़ी भूल थी।
सहयोगियों ने दिखाया आईना
केवल आजाद ही नहीं, बीजेपी के दो बड़े सहयोगियों अकाली दल और
शिवसेना ने आवाज उठानी शुरू कर दी है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने साफ कहा, "दिल्ली के लोगों ने साफ बता दिया है कि लहर से बड़ी सुनामी होती है।" पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा, "बीजेपी को अब समझ लेना चाहिए कि वोटरों को इग्नोर नहीं किया जा सकता।"
अकाली दल ने उठाए सबसे गंभीर सवाल
दिल्ली चुनाव में कैंडिडेट रहे शिरोमणि अकाली दल के मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, "हार की दो मुख्य वजहें बीजेपी के कट्टरपंथी तत्व और
किरण बेदी को सीएम प्रोजेक्ट करना हैं।" सिरसा दिल्ली में चुनाव लड़ने वाले सबसे अमीर कैंडिडेट थे। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के ‘रामजादों और ...जादों’ वाले कमेंट और फिर डेरा सच्चा सौदा के समर्थन ने उनकी जीत की संभावनाओं को बिल्कुल खत्म कर दिया। सिरसा ने कहा, "साध्वी ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह कोई स्वीकार नहीं कर सकता। मेरे विधानसभा क्षेत्र में काफी मुस्लिम वोटर थे और इस कमेंट के बाद वो हमसे दूर हो गए।" साध्वी ने एक चुनावी सभा में विरोधियों पर निशाना साधते हुए लोगों से कहा था कि आपको तय करना है कि आपको रामजादों की सरकार चाहिए, या हरामजादों की।
सिरसा ने कहा, "क्षेत्र के नौ हजार मुसलमान वोटों में से मुझे केवल 107 वोट मिले। 4400 वाल्मीकि वोटों में से तीन हजार
‘आप’ को मिले और जो बचे वो मुझे और कांग्रेस को मिले। साध्वी के बयानों से किसी को मदद नहीं मिली।" सिरसा ने कहा, "दिल्ली के लोग पढ़े-लिखे तथा समझदार हैं। हर कोई यहां सांप्रदायिक सद्भाव चाहता है और कट्टरपंथी तत्वों की यहां कोई जगह नहीं है।"
किरण बेदी को सीएम प्रोजेक्ट किए जाने के बीजेपी के फैसले पर सवाल उठाते हुए सिरसा ने कहा, "किरण बेदी को बीजेपी पार्टी में लाई और सीधे सीएम प्रोजेक्ट कर दिया, लोकल लीडरशिप से सलाह भी नहीं ली गई, कृष्णा तीरथ के बारे में यही बात है।" उन्होंने कहा कि अब बीजेपी और अकाली दल, दोनों को मिलकर आत्मपरीक्षण करना चाहिए। लोकल लीडर्स से बात की जानी चाहिए।
सिरसा ने कहा कि साध्वी निरंजन ज्योति को प्रचार के लिए लाने से पहले उनसे पूछा ही नहीं गया। यही मामला डेरा सच्चा सौदा के बारे में भी है। बीजेपी को मुझसे पूछना तो चाहिए था।0 आखिर अकाली दल बीजेपी का सहयोगी दल है। हमने बीजेपी की हरियाणा और पंजाब में बहुत मदद की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने जैसे ही मुझे बताया कि बीजेपी डेरा सच्चा सौदा से मदद ले रही है तो मैंने अखबार में विज्ञापन देकर इसका विरोध किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। सिरसा ने ये भी कहा कि अगर नामांकन दाखिल करने के पहले मुझे ये पता लग जाता कि बीजेपी डेरे का समर्थन ले रही है तो मैं चुनाव ही नहीं लड़ता। उन्होंने कहा कि मैंने चुनाव केवल इसिलए लड़ा, ताकि लोग मुझे ‘भगोड़ा’ करार न दे सकें।
ये कहा था साध्वी निरंजन ज्योति ने चुनाव प्रचार के दौरान
निरंजन ने दिसंबर में दिल्ली की एक चुनावी सभा में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर निशाना साधते हुए कहा था, "बर्तनों की दुकान चलाने वाले का बेटा सोनिया गांधी का दामाद अरबपति-खरबपति कैसे हो गया? उसने गरीबों को लूटा है, चूसा है। मोदी जी कहते हैं कि न खाएंगे, न खाने देंगे। यह आपको तय करना है कि दिल्ली में रामजादों की सरकार बनेगी या हरामजादों की।"
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