नई दिल्ली. सरकार आरटीआई के दायरे से राजनीतिक दलों को बाहर रखने के लिए नया संशोधन का मजमून जल्द ही कैबिनेट में लाने वाली है। केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) इससे संबंधित फैसले पर राजनीतिक दल शुरू से ही नाराज हैं। लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इस पर सरकार से संपर्क किया है। सरकार ने भी सीआईसी के इस फैसले को नकार दिया है।
सरकार का कहना है कि राजनीतिक दल पब्लिक अथॉरिटी नहीं हैं इसलिए सीआईसी का आदेश मानने योग्य नहीं है। इस विषय में कांग्रेस ने यह साफ किया है कि चूंकि राजनीतिक दल चुनाव आयोग के प्रति जवाबदेह होते हैं और अपने खर्चे का ब्यौरा उसे सौंपते हैं इसलिए दूसरी संस्था के प्रति जवाबदेह होने की कोई जरूरत नहीं है। कानून मंत्री कपिल सिब्बल कहते हैं कि उन्होंने इस विषय में अटार्नी जनरल से मशविरा कर नोट डीओपीटी को भेज दिया है। डीओपीटी मंत्री नारायण सामी का कहना है कि कैबिनेट नोट तैयार है और इसे मंत्रिमंडल की बैठक में पास करवाने के लिए जल्द जाया जाएगा। इसके बाद इसे संसद में रखा जाएगा। इस विषय में संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ को तमाम राजनीतिक दलों से बात करने के लिए कहा भी गया है। कमलनाथ ने इस विषय में राजनीतिक दलों से बात भी कर ली है।