नई दिल्ली. दिल्ली में रविवार को नीति आयोग की बैठक में प्रधामनंत्री
नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विकास, रोजगार और अधिक से अधिक निवेश के लिए परस्पर सहयोग पर जोर दिया। नीति आयोग की बैठक में हुई इस चर्चा के बारे में आपने अखबारों में अब तक पढ़ लिया होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि इस बैठक में किसी भी मुख्यमंत्री को अपने मुख्य सचिव के साथ जाने की अनुमति नहीं थी। सारे मुख्य सचिवों को रिसेप्शन पर ही इंतजार करने को कहा गया था।
कुछ मुख्यमंत्रियों को अपने राज्य के प्रेजेंटेशन के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। ऐसे में वे मीटिंग को छोड़कर रिसेप्शन पर गए और चीफ सेक्रेट्री से इस बारे में पूछा। अधिकतर मुख्यमंत्री इस पाबंदी से नाराज थे। उनका कहना था कि इस तरह की बैठक के दौरान आमतौर पर सरकारी अधिकारियों के पास ही सारे फैक्ट्स होते हैं। ऐसे में अधिकारियों को बाहर रखना उचित नहीं है। एक कांग्रेसी मुख्यमंत्री ने तो इसका जिक्र भी कर दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, पहले मुझे अपने मुख्य सचिव से बात करने दीजिए। मेरे पास इससे जुड़े कागजात नहीं हैँ। एक गैर हिंदीभाषी राज्य के मुख्यमंत्री ने तो मीटिंग का बायकॉट करने का फैसला तक कर लिया था, लेकिन उनके पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया। हालांकि ये मुख्यमंत्री अपना विरोध जताने के लिए प्रधानमंत्री को एक पत्र भेज सकते हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के रिसेप्शन पर बैठे सरकारी अधिकारी इस घटनाक्रम से काफी नाराज थे। उनका तर्क था कि 30 साल से ज्यादा अनुभव वाले अधिकारियों को रिसेप्शन पर दरबान की तरह क्यों बैठाया गया। एक चीफ सेक्रेट्री को तो यह कहते हुए भी सुना गया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन्हें इस बारे में पहले ही बता देने की जहमत तक नहीं उठाई। आखिरकार ये सभी सरकारी अधिकारी करीब तक घंटे तक रिसेप्शन में अखबार पढ़ते रहे।