नई दिल्ली. तेलंगाना के मुद्दे पर राजनीति तेज होने की संभावना के बीच इस मुद्दे पर आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी नफा-नुकसान का गणित लगाया जाने लगा है। चुनावी सर्वे करने वाले संगठन सी वोटर के डायरेक्टर यशवंत देशमुख के मुताबिक सैद्धांतिक तौर पर राज्य में चौतरफा चुनावी लड़ाई है। लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि सीमांध्रा, तेलंगाना और रायलसीमा में मुकाबला चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली तेलुगूदेशम पार्टी (टीडीपी) और जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के बीच दो तरफा ही है।
अनुमान
इसी महीने किए गए इंडिया टुडे सी वोटर के सर्वे के मुताबिक आंध्र प्रदेश में तेलुगूदेशम पार्टी को 8, तेलंगाना राष्ट्र समिति को 13, वाईएसआर कांग्रेस को 13, कांग्रेस को 7 लोकसभा सीटें मिल सकती हैं। वाईएसआर कांग्रेस को तेलंगाना और तेलंगाना राष्ट्र समिति को सीमांध्रा में कोई सीट मिलती नहीं दिख रही है। लेकिन तेलुगूदेशम पार्टी पूरे आंध्र प्रदेश में सीटें जीत सकती है। आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 42 सीटें हैं।
कांग्रेस का होगा सूपड़ा साफ
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा 30 लोकसभा सीटें हैं। लेकिन कांग्रेस तेलंगाना की मांग कर रही तेलंगाना राष्ट्र समिति या तेलंगाना के विरोध में खड़ी जगन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं कर पाती है तो कांग्रेस के लिए पूरे राज्य में अगले लोकसभा चुनाव में कोई उम्मीद नहीं है।
आंध्र प्रदेश में तीन भावनाएं हावी
आंध्र प्रदेश में तीन तरह की बातें सामने आ रही हैं। पहला-तेलंगाना बनकर रहेगा। दूसरा-तटीय आंध्र प्रदेश के इलाकों ने यह मान लिया है कि तेलंगाना बनने से रोक पाना असंभव है। समाज का यह तबका टीडीपी के पक्ष में जाता दिख रहा है। तीसरा-आंध्र प्रदेश का रायलसीमा इलाका तेलंगाना बनाए जाने के खिलाफ है। रायलसीमा में वाईएसआर कांग्रेस को जबर्दस्त बढ़त मिलती दिख रही है।
गठबंधन का समीकरण
टीडीपी बीजेपी के साथ चुनावी तालमेल करना चाहती है। लेकिन टीडीपी को इस बात का ध्यान रखना होगा कि राज्य में बीजेपी के वोटों का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय टीडीपी ने बीजेपी पर दबाव बनाकर तेलंगाना के ठंडे बस्ते में डाल दिया था। लेकिन इसी मौके का फायदा उठाकर तेलंगाना राष्ट्र समिति जैसी पार्टी ने तेलंगाना मुद्दे को खूब हवा दी। लेकिन अब बीजेपी ने तेलंगाना के पक्ष में स्टैंड लेकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। जहां तक गठबंधन की बात है तो जगन मोहन रेड्डी ने भी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार
नरेंद्र मोदी का समर्थन किया है। पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान जगन ने मोदी के साथ गठबंधन की संभावना पर कहा था, क्यों नहीं? कोई भी अछूत नहीं है। हम मोदी के साथ काम करना चाहते हैं। जो भी हमारी मांगें मानेगा वह हमें मंजूर होगा।
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